kaifiyat-e-dil-e-hazeen ham se nahin bayaañ hui | कैफ़ियत-ए-दिल-ए-हज़ीं हम से नहीं बयाँ हुई

  - B S Jain Jauhar
कैफ़ियत-ए-दिल-ए-हज़ींहमसेनहींबयाँहुई
लफ़्ज़साथदेसकेआँसुओंसेअयाँहुई
शोरिश-ए-वारदात-ए-क़ल्बशे'रोंमेंढालढालकर
लिखतेरहेतमामउम्रख़त्मदास्ताँहुई
अबवोदिलमेंधड़कनेंअबवोसोज़-ओ-साज़है
पूछतेहैंवफ़ात-ए-दिलकैसेहुईकहाँहुई
मेरीज़रासीबातपरजानेवोक्यूँँख़फ़ाहुई
कोईतल्ख़गुफ़्तुगूदोनोंकेदरमियाँहुई
घरतोहज़ारोंबनगएईंटोंकोजोड़जोड़कर
घरकेमकीनोंकीवफ़ाज़ीनत-ए-आशियाँहुई
सूरतथीवोकिबर्क़सीबदलियोंकीथीओटमें
पर्दोंसेझाँकझाँककरपर्दोंमेंहीनिहाँहुई
एकहीशाख़पररहेबाढ़मेंसाँपऔरआदमी
कैसीअजीबदोस्तीदोनोंकेदरमियाँहुई
  - B S Jain Jauhar
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