ghatta saawan ki umdi aa rahi hai | घटा सावन की उमडी आ रही है

  - B S Jain Jauhar
घटासावनकीउमडीरहीहै
पयाम-ए-अश्कभरभरलारहीहै
रगोंमेंख़ूनगर्दिशकररहाहै
जवानीसाज़-ए-दिलपरगारहीहै
रुलाताहैउन्हेंभीक्यायेसावन
मुझेकालीघटातड़पारहीहै
तरन्नुम-ख़ेज़जमुनाकेकिनारे
किसीकीयादपैहमरहीहै
येआख़िरकौनहैजोचुपखड़ाहै
नज़रहरबारधोकाखारहीहै
हमअपनेदिलकादुखड़ारोरहेहैं
तुम्हारीआँखझपकीजारहीहै
तुमअपनेध्यानमेंडूबीहुईहो
तुम्हारीओढ़नीलहरारहीहै
मिरीबे-ख़्वाबआँखोंकोमुबारक
किआख़िरमौतकीनींदरहीहै
  - B S Jain Jauhar
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