nag | नग़्में तड़प रहे हैं दिल-ए-बे-क़रार में

  - B S Jain Jauhar
नग़्मेंतड़परहेहैंदिल-ए-बे-क़रारमें
आँखेंबरसरहीहैंग़म-ए-इंतिज़ारमें
फ़ितरतउदाससीहैघटाएँहैंसोगवार
इकग़म-नसीबहुस्नहैअब्र-ए-बहारमें
हैज़र्राज़र्राशौक़-ए-समाअ'तसेबे-क़रार
तुमगुनगुनारहेहोकिसीआबशारमें
सावनकीरुतबहारकामौसमअँधेरीरात
रिम-झिमकेगीतगूँजरहेहैंफुवारमें
सपनोंमेंहोगयाहैसवेराकहींमुझे
बैठाहुआहूँजैसेकिसीलाला-ज़ारमें
ऐसालगाकिसाथहीगातेहैंआबशार
क्यामोहनीसीलयहैतुम्हारेसितारमें
क्यूँँआजसरझुकाएहुएरोरहेहोतुम
बिखरेहुएहैंबालग़म-ओ-इंतिशारमें
  - B S Jain Jauhar
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