mujh ko vehshat hui mire ghar se | मुझ को वहशत हुई मिरे घर से

  - Azhar Iqbal
मुझकोवहशतहुईमिरेघरसे
राततेरीजुदाईकेडरसे
तेरीफ़ुर्क़तकाहब्सथाअंदर
औरदमघुटरहाथाबाहरस
जिस्मकीआगबुझगईलेकिन
फिरनदामतकेअश्कभीबरसे
एकमुद्दतसेहैंसफ़रमेंहम
घरमेंरहकरभीजैसेबेघरसे
बार-हातेरीजुस्तुजूमेंहम
तुझसेमिलनेकेबादभीतरसे
  - Azhar Iqbal
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