vo mahtaab abhii baam par nahin aaya | वो माहताब अभी बाम पर नहीं आया

  - Azhar Iqbal
वोमाहताबअभीबामपरनहींआया
मिरीदु'आओंमेंशायदअसरनहींआया
बहुतअजीबहैयारोंबुलंदियोंकातिलिस्म
जोएकबारगयालौटकरनहींआया
येकाएनातकीवुसअतखुलीनहींमुझपर
मैंअपनीज़ातसेजबतकगुज़रनहींआया
बहुतदिनोंसेहैबे-शक्लसीमेरीमिट्टी
बहुतदिनोंसेकोईकूज़ा-गरनहींआया
बसएकलम्हेकोबे-पैराहनउसेदेखा
फिरइसकेबादमुझेकुछनज़रनहींआया
हमअबभीदश्तमेंख़ेमालगाएबैठेहैं
हमारेहिस्सेमेंअपनाहीघरनहींआया
ज़मीनबाँझहोजाएकुछकहो'अज़हर'
सुख़नकीशाख़पेकबसेसमरनहींआया
  - Azhar Iqbal
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