hui na khatm teri rahguzar kya karte | हुई न ख़त्म तेरी रहगुज़ार क्या करते

  - Azhar Iqbal
हुईख़त्मतेरीरहगुज़ारक्याकरते
तेरेहिसारसेख़ुदकोफ़रारक्याकरते
सफ़ीनाग़र्क़हीकरनापड़ाहमेंआख़िर
तिरेबग़ैरसमुंदरकोपारक्याकरते
बसएकसुकूतहीजिसकाजवाबहोनाथा
वहीसवालमियाँबारबारक्याकरते
फिरइसकेबादमनायाजश्नख़ुश्बूका
लहूमेंडूबीथीफ़स्ल-ए-बहारक्याकरते
नज़रकीज़दमेंनएफूलगए'अज़हर'
गईरुतोंकाभलाइंतिज़ारक्याकरते
  - Azhar Iqbal
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy