jigar aur dil ko bachaana bhi hai | जिगर और दिल को बचाना भी है

  - Asrar Ul Haq Majaz
जिगरऔरदिलकोबचानाभीहै
नज़रआपहीसेमिलानाभीहै
मोहब्बतकाहरभेदपानाभीहै
मगरअपनादामनबचानाभीहै
जोदिलतेरेग़मकानिशानाभीहै
क़तील-ए-जफ़ा-ए-ज़मानाभीहै
येबिजलीचमकतीहैक्यूँँदम-ब-दम
चमनमेंकोईआशियानाभीहै
ख़िरदकीइताअतज़रूरीसही
यहीतोजुनूँकाज़मानाभीहै
दुनियाउक़्बाकहाँजाइए
कहींअहल-ए-दिलकाठिकानाभीहै
मुझेआजसाहिलपेरोनेभीदो
कितूफ़ानमेंमुस्कुरानाभीहै
ज़मानेसेआगेतोबढ़िए'मजाज़'
ज़मानेकोआगेबढ़ानाभीहै
  - Asrar Ul Haq Majaz
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