फ़िराक़-ए-यारकेमारेनहींहैंहमआसिफ़
विसाल-ए-यारसेघुटताहैअपनादमआसिफ़
हरीफ़-ए-जाँसेमरासिमतोबाहमीहैंमगर
अज़ीज़-ए-जाँसेत'अल्लुक़नहींबहमआसिफ़
तबीबकोशिश-ए-दरमाँमेंमरगएसारे
मगरदिलोंकीजराहतहुईनकमआसिफ़
कोईहैमहव-ए-फ़ुग़ाँतोकोईहैनालागर
यहाँपेकिसकोसुनाएँहमअपनाग़मआसिफ़
लिहाज़कीजिएउनकालिहाज़लाज़िमहै
ज़मानेपरयेसमझिएकिहैंकरमआसिफ़
हसींबदनकीरसाईसेतंगलोगोंमें
फ़िराक़-ए-यारकाथा
मेंहुएअलमआसिफ़
जबींझुकाकेसर-ए-जामबादा-ख़्वारोंने
बनाकेछोड़ाहैमयखा़नेकोहरमआसिफ़
सितमगरोंकीयेबस्तीनमकचुरालेगी
किसीकेआगेमतआनाब-चश्म-ए-नमआसिफ़
हवा-ए-तुंदसेकहदोकीलौटजाएअब
खड़ेहुएहैंचराग़ोंकेसाथहमआसिफ़
पयम्बरोंसेकोईउनकीलाठियाँछीने
रखेहुएहैंमेरेदिलमेंकुछसनमआसिफ़
शब-ए-फ़िराक़कोदींगालियाँबहुतउसने
सुनारहीहैमुझेशामअपनाग़मआसिफ़
ग़रीबीऐसीकिबसवक़्तमेरीजेबमेंहै
मैंफिरभीतुझपेलुटाऊँगायेरक़मआसिफ़
मसर्ररतोंकीहैमहफ़िलब-जुज़लिहाज़नहीं
उदासियोंकाहैंथा
मेंहुएअलमआसिफ़