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Abdulla Asif
Samt e panjum mein tu chuupa hai kahin
सम्त-ए-पंजुम में तू छुपा है कहीं
- Abdulla Asif
सम्त-ए-पंजुम
में
तू
छुपा
है
कहीं
शौक़-ए-दीदार
से
भरे
हम
लोग
- Abdulla Asif
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ख़ुद
पे
होता
है
गुमाँ
मुझको
ख़ुदा
होने
का
बात
आती
है
मसीहाई
पे
तो
रोता
हूँ
Abdulla Asif
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कौन
भरोसा
करता
है
'आसिफ़'
अच्छा
लड़का
है
आग
लगा
दो
दरिया
को
मेरा
दुश्मन
प्यासा
है
ख़ून
बहा
दो
मिट्टी
का
इसने
अमृत
बोया
है
मेरा
दुश्मन
है
आगे
मेरे
आगे
शीशा
है
राजा
ताज
पलट
कर
देख
बिल्कुल
काँसा
लगता
है
बाहर
बाहर
हैं
ख़ुशियाँ
अंदर
अंदर
रोना
है
जाने
को
तैयार
है
बस
कोई
बिछड़ने
वाला
है
मुफ़्ती
जन्नत
देखेगा
जा
आगे
मय-ख़ाना
है
मेरा
भरोसा
कर
मैंने
सच
में
झूठ
ही
बोला
है
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Abdulla Asif
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ख़ला
की
ज़ीनतें
महफ़िल
ख़ला
की
शान
है
सूरज
सितारे
रक़्स
करते
हैं
तेरे
आगे
तेरे
पीछे
क़मर
के
नूर
से
ऊपर
तू
ही
अफ़ज़ल
तू
ही
पारस
वो
सारे
रंग
फ़ीके
हैं
तेरे
आगे
तेरे
पीछे
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Abdulla Asif
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अमीरी
दौलतों
से
इक
न
इक
दिन
मिल
ही
जाती
है
रईसी
ख़ून
में
होती
है
आख़िर
कैसे
लाओगे
Abdulla Asif
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मुझको
जो
आपने
यूँँ
पुकारा
है
बे
जनाब
तौहीन
हो
गई
है
मेरी
पाक-ज़ात
की
Abdulla Asif
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