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A R Sahil "Aleeg"
sirf meri nahin hai vo leila
sirf meri nahin hai vo leila | सिर्फ़ मेरी नहीं है वो लैला
- A R Sahil "Aleeg"
सिर्फ़
मेरी
नहीं
है
वो
लैला
मेरे
जैसे
हैं
साठ
सत्तर
और
- A R Sahil "Aleeg"
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मंज़र
बना
हुआ
हूँ
नज़ारे
के
साथ
मैं
कितनी
नज़र
मिलाऊँ
सितारे
के
साथ
मैं
दरिया
से
एक
घूँट
उठाने
के
वास्ते
भागा
हूँ
कितनी
दूर
किनारे
के
साथ
मैं
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Khalid Sajjad
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निभाया
जिस
सेे
भी
रिश्ता
तो
फिर
हद
में
रहे
हैं
हम
किसी
के
मखमली
तकिए
के
ऊपर
सर
नहीं
रक्खा
Nirbhay Nishchhal
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मौत
के
साथ
हुई
है
मिरी
शादी
सो
'ज़फ़र'
उम्र
के
आख़िरी
लम्हात
में
दूल्हा
हुआ
मैं
Zafar Iqbal
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कुछ
तो
हवा
भी
सर्द
थी
कुछ
था
तिरा
ख़याल
भी
दिल
को
ख़ुशी
के
साथ
साथ
होता
रहा
मलाल
भी
Parveen Shakir
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अब
मज़ीद
उस
सेे
ये
रिश्ता
नहीं
रक्खा
जाता
जिस
सेे
इक
शख़्स
का
पर्दा
नहीं
रक्खा
जाता
पढ़ने
जाता
हूँ
तो
तस्में
नहीं
बाँधे
जाते
घर
पलटता
हूँ
तो
बस्ता
नहीं
रक्खा
जाता
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Tehzeeb Hafi
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धूप
भी
आराम
करती
थी
जहाँ
अपना
ऐसी
छाँव
से
नाता
रहा
Madan Mohan Danish
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बदले
मौसम
हालात
यहाँ
है
ख़ुशियों
की
बारात
यहाँ
होली
खेलेंगे
हम
भी
पर
खेलेंगे
तेरे
साथ
यहाँ
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Kaviraj " Madhukar"
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फिरता
है
कैसे-कैसे
सवालों
के
साथ
वो
उस
आदमी
की
जामातलाशी
तो
लीजिए
Dushyant Kumar
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कितनी
मुश्किल
के
बाद
टूटा
है
एक
रिश्ता
कभी
जो
था
ही
नहीं
Shahbaz Rizvi
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दिल
बना
दोस्त
तो
क्या
क्या
न
सितम
उस
ने
किए
हम
भी
नादां
थे
निभाते
रहे
नादान
के
साथ
Shakeel Badayuni
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है
उसे
ख़्वाहिश
अब
गुमनामी
की
शायद
जा
रहा
महफ़िल
शोहरत
की,
छोड़
कर
वो
A R Sahil "Aleeg"
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पहले
पहल
जो
हो
गए
नाकाम
इश्क़
में
ये
मशवरा
है
इश्क़
दुबारा
न
कीजिए
A R Sahil "Aleeg"
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इश्क़
का
माज़ी
हो
मुस्तक़बिल
या
ताज़ा
इश्क़
कोई
एक
नुक़्ता
ने
किया
इस
दास्ताँ
को
ना-मुकम्मल
A R Sahil "Aleeg"
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है
इश्क़
ऐसा
गुनाह
जिसका
नहीं
है
मुमकिन
कोई
इज़ाला
A R Sahil "Aleeg"
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हम
ने
देखा
है
हुस्न
का
दरिया
रोज़
सौ
कश्तियाँ
डुबोता
है
जिस
को
मिल
जाए
इश्क़
में
'साहिल'
सच
में
वो
ख़ुश-नसीब
होता
है
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A R Sahil "Aleeg"
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