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A R Sahil "Aleeg"
phir se is ishq ki khata ab kaun kare
phir se is ishq ki khata ab kaun kare | फिर से इस इश्क़ की ख़ता अब कौन करे
- A R Sahil "Aleeg"
फिर
से
इस
इश्क़
की
ख़ता
अब
कौन
करे
भर
चुके
ज़ख़्म
जो,
हरा
अब
कौन
करे
- A R Sahil "Aleeg"
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इश्क़
माशूक़
इश्क़
'आशिक़
है
यानी
अपना
ही
मुब्तला
है
इश्क़
Meer Taqi Meer
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इश्क़
में
तेरे
गँवा
दी
ये
जवानी
जानेमन
हो
गई
दिलचस्प
अपनी
भी
कहानी
जानेमन
Tanoj Dadhich
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मेरा
किरदार
मेरी
बात
कहाँ
सुनता
है
ये
समझदार
मेरी
बात
कहाँ
सुनता
है
इश्क़
है
वादा-फ़रामोश
नहीं
है
कोई
दिल
तलबगार
मेरी
बात
कहाँ
सुनता
है
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Vishal Singh Tabish
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मैं
दौड़
दौड़
के
ख़ुद
को
पकड़
के
लाता
हूँ
तुम्हारे
इश्क़
ने
बच्चा
बना
दिया
है
मुझे
Liaqat Jafri
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जनाज़े
पर
मेरे
लिख
देना
यारों
मोहब्बत
करने
वाला
जा
रहा
है
Rahat Indori
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इश्क़
पर
ज़ोर
नहीं
है
ये
वो
आतिश
'ग़ालिब'
कि
लगाए
न
लगे
और
बुझाए
न
बने
Mirza Ghalib
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ये
मोहब्बत
के
महल
तामीर
करना
छोड़
दे
मैं
भी
शहज़ादा
नहीं
हूँ
तू
भी
शहज़ादी
नहीं
Afzal Khan
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मेरी
तन्हाई
देखेंगे
तो
हैरत
ही
करेंगे
लोग
मोहब्बत
छोड़
देंगे
या
मोहब्बत
ही
करेंगे
लोग
Ismail Raaz
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तू
मोहब्बत
नहीं
समझती
है
हम
भी
अपनी
अना
में
जलते
हैं
इस
दफा
बंदिशें
ज़ियादा
हैं
छोड़
अगले
जनम
में
मिलते
हैं
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Ritesh Rajwada
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ज़्यादा
मीठा
हो
तो
चींटा
लग
जाता
है
सच्चे
इश्क़
को
अक्सर
बट्टा
लग
जाता
है
हमने
अपनी
जान
गंवाई
तब
जाना
भाव
मिले
तो
कुछ
भी
सट्टा
लग
जाता
है
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Ritesh Rajwada
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क्या
ज़रूरी
था
तेरा
मुझ
से
जफ़ा
करना
यूँँ
इश्क़
में
लाख
तरीक़े
थे
बिछड़
जाने
के
A R Sahil "Aleeg"
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तुम्हारा
सच
तुम्हारा
सच,
मेरा
सच
मेरा
सच
है
न
तुम
झूठे
न
मैं,
ये
तजरबा
है
अपना
अपना
A R Sahil "Aleeg"
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इश्क़
की
एक
कहानी
भी
है
ये
ताजमहल
ग़म
जुदाई
का
सुनाती
भी
है
ये
ताजमहल
हाथ
कटवा
दे
जो
मा'सूम
से
मज़दूरों
के
ख़ूँ-फ़िशानी
की
निशानी
भी
है
ये
ताजमहल
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A R Sahil "Aleeg"
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मुझ
पर
ये
ज़ुल्म-ए-हुस्न
कोई
कम
नहीं
यहाँ
बोसे
की
ख़्वाहिशात
शिकायत
के
साथ
साथ
इस
आशिक़ी
ने
मुझ
को
सुख़न-वर
बना
दिया
मैं
शे'र
कह
रहा
हूँ
मुहब्बत
के
साथ
साथ
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A R Sahil "Aleeg"
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लिख
दिया
अल्लाह
ने
दज्जाल
के
माथे
पे
काफ़िर
इश्क़
में
कोई
निशानी
बेवफ़ाओं
की
भी
लिखता
A R Sahil "Aleeg"
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