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A R Sahil "Aleeg"
kya zaroori tha teraa mujh se jafaa karna yuñ
kya zaroori tha teraa mujh se jafaa karna yuñ | क्या ज़रूरी था तेरा मुझ से जफ़ा करना यूँँ
- A R Sahil "Aleeg"
क्या
ज़रूरी
था
तेरा
मुझ
से
जफ़ा
करना
यूँँ
इश्क़
में
लाख
तरीक़े
थे
बिछड़
जाने
के
- A R Sahil "Aleeg"
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हिज्र
में
इश्क़
यूँँ
रखा
आबाद
हिचकियांँ
तन्हा
तन्हा
लेते
रहे
Siraj Tonki
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तेरा
चेहरा
सुब्ह
का
तारा
लगता
है
सुब्ह
का
तारा
कितना
प्यारा
लगता
है
तुम
से
मिल
कर
इमली
मीठी
लगती
है
तुम
से
बिछड़
कर
शहद
भी
खारा
लगता
है
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Kaif Bhopali
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उभर
कर
हिज्र
के
ग़म
से
चुनी
है
ज़िंदगी
हमने
वगरना
हम
जहाँ
पर
थे
वहाँ
पर
ख़ुद-कुशी
भी
थी
Naved sahil
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अब
तो
मैं
बाल
बढ़ा
सकता
हूँ
हिज्र
में
कितनी
सहूलत
है
मुझे
Nasir khan 'Nasir'
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'मुनीर'
अच्छा
नहीं
लगता
ये
तेरा
किसी
के
हिज्र
में
बीमार
होना
Muneer Niyazi
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उस
सेे
तो
मैं
बिछड़
गया
अब
देख
ऐ
'पवन'
कब
दुनिया
आए
रास
यही
सोचता
रहा
Pawan Kumar
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तुम्हारा
हिज्र
मना
लूँ
अगर
इजाज़त
हो
मैं
दिल
किसी
से
लगा
लूँ
अगर
इजाज़त
हो
Jaun Elia
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अभी
तो
जान
कहता
फिर
रहा
है
तू
तुझे
हम
हिज्र
वाले
साल
पूछेंगे
Parul Singh "Noor"
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भरम
रखा
है
तेरे
हिज्र
का
वरना
क्या
होता
है
मैं
रोने
पे
आ
जाऊँ
तो
झरना
क्या
होता
है
मेरा
छोड़ो
मैं
नइँ
थकता
मेरा
काम
यही
है
लेकिन
तुमने
इतने
प्यार
का
करना
क्या
होता
है
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Tehzeeb Hafi
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काट
पाऊँगा
मैं
कैसे
ज़िंदगी
तेरे
बग़ैर
तीन
दिन
का
हिज्र
मुझ
को
लग
रहा
है
तीन
साल
Afzal Ali Afzal
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तेरे
वुजूद
से
गुलज़ार
आज
भी
है
दिल
मैं
दश्त-ए-इश्क़
में
बेकार
ढूँढता
हूँ
तुझे
A R Sahil "Aleeg"
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हुस्न
को
रब
ने
क्या
कशिश
दी
है
जिसने
हर
आँख
को
ख़लिश
दी
है
ज़ख़्म-ए-उल्फ़त
कहाँ
छुपाऊंँ
मैं
दर्द
ने
दिल
में
फिर
दबिश
दी
है
वो
ही
झलकेगी
उनके
लहजे
से
जैसी
बच्चों
को
परवरिश
दी
है
सब
पे
उंगली
उठा
रहे
हैं
आप
क्या
कभी
ख़ुद
को
सरज़निश
दी
है
मैंने
मिसरों
को
ख़ून
दे
देकर
शोख़
ग़ज़लों
को
भी
तपिश
दी
है
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A R Sahil "Aleeg"
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नित
वफ़ा
की
तवक़्क़ु'आत
न
रख
इश्क़
में
ये
हराम
है
'साहिल'
A R Sahil "Aleeg"
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इब्तिदा-ए-इश्क़
इक
कमज़ोर
लम्हे
की
कहानी
इख़्तिताम-ए-इश्क़
लेकिन
दास्ताँ
इक
उम्र
भर
की
A R Sahil "Aleeg"
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मान
लीजे
मुझे
हक़ीर-ए-इश्क़
आप
भी
तो
नहीं
अमीर-ए-इश्क़
दिल
भी
घाइल
है
रूह
भी
घाइल
इस
तरह
मारा
उसने
तीर-ए-इश्क़
ध्यान
रखना
के
मुँह
न
जल
जाए
आप
पी
तो
रहे
हैं
शीर-ए-इश्क़
रोज़
फूले-फले
ये
इश्क़
की
पौध
दे
रहा
है
दु'आ
फ़क़ीर-ए-इश्क़
सीखिए
इश्क़
की
क़वाइद
और
मारिए
रोज़
आप
तीर
ए
इश्क़
उम्र
भर
उसने
बे-वफ़ाई
की
वो
जो
बैठा
है
बन
के
पीर-ए-इश्क़
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A R Sahil "Aleeg"
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