hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
A R Sahil "Aleeg"
husn ko rab ne kya kashish dii hai
husn ko rab ne kya kashish dii hai | हुस्न को रब ने क्या कशिश दी है
- A R Sahil "Aleeg"
हुस्न
को
रब
ने
क्या
कशिश
दी
है
जिसने
हर
आँख
को
ख़लिश
दी
है
ज़ख़्म-ए-उल्फ़त
कहाँ
छुपाऊंँ
मैं
दर्द
ने
दिल
में
फिर
दबिश
दी
है
वो
ही
झलकेगी
उनके
लहजे
से
जैसी
बच्चों
को
परवरिश
दी
है
सब
पे
उंगली
उठा
रहे
हैं
आप
क्या
कभी
ख़ुद
को
सरज़निश
दी
है
मैंने
मिसरों
को
ख़ून
दे
देकर
शोख़
ग़ज़लों
को
भी
तपिश
दी
है
- A R Sahil "Aleeg"
Download Ghazal Image
उस
से
कहना
की
धुआँ
देखने
लाएक़
होगा
आग
पहने
हुए
मैं
जाऊँगा
पानी
की
तरफ़
Abhishek shukla
Send
Download Image
31 Likes
किसी
की
तपिश
में
ख़ुशी
है
किसी
की
किसी
की
ख़लिश
में
मज़ा
है
किसी
का
Unknown
Send
Download Image
53 Likes
इक
बर्फ़
सी
जमी
रहे
दीवार-ओ-बाम
पर
इक
आग
मेरे
कमरे
के
अंदर
लगी
रहे
Salim Saleem
Send
Download Image
21 Likes
गुदाज़-ए-इश्क़
नहीं
कम
जो
मैं
जवाँ
न
रहा
वही
है
आग
मगर
आग
में
धुआँ
न
रहा
Jigar Moradabadi
Send
Download Image
28 Likes
ये
आग
वाग
का
दरिया
तो
खेल
था
हम
को
जो
सच
कहें
तो
बड़ा
इम्तिहान
आँसू
हैं
Abhishek shukla
Send
Download Image
22 Likes
जिसको
बड़ा
गरूर
था
अपने
वजूद
पर
वो
आफ़ताब
शाम
की
चौखट
पे
मर
गया
Shahid Sagri
Send
Download Image
26 Likes
वो
बुझ
गया
तो
चला
उसकी
अहमियत
का
पता
कि
उस
की
आग
से
कितने
चराग़
जलते
थे
Shakeel Azmi
Send
Download Image
58 Likes
ये
सच
है
नफ़रतों
की
आग
ने
सब
कुछ
जला
डाला
मगर
उम्मीद
की
ठण्डी
हवाएँ
रोज़
आती
हैं
Munawwar Rana
Send
Download Image
23 Likes
मैं
आ
रहा
हूँ
अभी
चूम
कर
बदन
उस
का
सुना
था
आग
पे
बोसा
रक़म
नहीं
होता
Shanawar Ishaq
Send
Download Image
29 Likes
आग
उगलती
रातों
में
इक
शीतलता
सी
छायी
थी
गर्मी
की
छुट्टी
में
फिर
वो
मामा
के
घर
आई
थी
Shubham Seth
Send
Download Image
5 Likes
Read More
बन
नहीं
सकता
मैं
मक़्ता
उस
ग़ज़ल
का
अब
कभी
भी
इस
लिए
अश'आर
कह
कर
साथ,
मक़्ता
छोड़
रक्खा
A R Sahil "Aleeg"
Send
Download Image
1 Like
मेरी
वफ़ा
के
निशाँ
मत
तलाश
करना
अब
हूँ
गुम
मैं
तेरी
जफ़ा
इश्क़
बे-वफ़ाई
में
A R Sahil "Aleeg"
Send
Download Image
1 Like
मान
लीजे
मुझे
हक़ीर-ए-इश्क़
आप
भी
तो
नहीं
अमीर-ए-इश्क़
दिल
भी
घाइल
है
रूह
भी
घाइल
इस
तरह
मारा
उसने
तीर-ए-इश्क़
ध्यान
रखना
के
मुँह
न
जल
जाए
आप
पी
तो
रहे
हैं
शीर-ए-इश्क़
रोज़
फूले-फले
ये
इश्क़
की
पौध
दे
रहा
है
दु'आ
फ़क़ीर-ए-इश्क़
सीखिए
इश्क़
की
क़वाइद
और
मारिए
रोज़
आप
तीर
ए
इश्क़
उम्र
भर
उसने
बे-वफ़ाई
की
वो
जो
बैठा
है
बन
के
पीर-ए-इश्क़
Read Full
A R Sahil "Aleeg"
Download Image
0 Likes
बेहतर
की
जुस्तजू
में
होता
है
ऐसा
अक्सर
देते
हैं
लोग
अच्छे
को
भी
गवाँ
यहाँ
पर
A R Sahil "Aleeg"
Send
Download Image
1 Like
वो
पौदा
इश्क़
का
अब
गिन
रहा
है
आख़री
साँसें
मुज़फ़्फ़रपुर
में
पनगाया
था
अश्क-ए-खूँ
से
मैं
जिसको
A R Sahil "Aleeg"
Send
Download Image
1 Like
Read More
Bahadur Shah Zafar
Vishal Bagh
Sarvat Husain
Shahzad Ahmad
Hafeez Banarasi
Unknown
Krishna Bihari Noor
Khalid Nadeem Shani
Shahid Zaki
Abbas Tabish
Get Shayari on your Whatsapp
Dhoop Shayari
Mausam Shayari
Shaayar Shayari
Nazara Shayari
Judai Shayari