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A R Sahil "Aleeg"
meri vafaa ke nishaan mat talash karna ab
meri vafaa ke nishaan mat talash karna ab | मेरी वफ़ा के निशाँ मत तलाश करना अब
- A R Sahil "Aleeg"
मेरी
वफ़ा
के
निशाँ
मत
तलाश
करना
अब
हूँ
गुम
मैं
तेरी
जफ़ा
इश्क़
बे-वफ़ाई
में
- A R Sahil "Aleeg"
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है
ये
कैसा
सितम
मौला
ये
हैं
दुश्वारियाँ
कैसी
जहाँ
पर
रोना
था
हमको
वहीं
पर
मुस्कुराना
है
Aqib khan
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इस
गए
साल
बड़े
ज़ुल्म
हुए
हैं
मुझ
पर
ऐ
नए
साल
मसीहा
की
तरह
मिल
मुझ
से
Sarfraz Nawaz
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टक
गोर-ए-ग़रीबाँ
की
कर
सैर
कि
दुनिया
में
उन
ज़ुल्म-रसीदों
पर
क्या
क्या
न
हुआ
होगा
Meer Taqi Meer
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जो
अंजान
थे
वो
मेरे
यार
निकले
मगर
जो
भी
अपने
थे
बेकार
निकले
ज़मीं
खा
गई
उन
वफ़ाओं
को
आख़िर
सितम
ये
हुआ
हम
गुनहगार
निकले
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Hameed Sarwar Bahraichi
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ज़ुल्म
फिर
ज़ुल्म
है
बढ़ता
है
तो
मिट
जाता
है
ख़ून
फिर
ख़ून
है
टपकेगा
तो
जम
जाएगा
Sahir Ludhianvi
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निगल
ही
चुका
था
जफ़ा
का
निवाला
अना
फिर
तमाशा
नया
कर
रही
है
Amaan Pathan
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ज़ालिम
था
वो
और
ज़ुल्म
की
आदत
भी
बहुत
थी
मजबूर
थे
हम
उस
से
मोहब्बत
भी
बहुत
थी
Kaleem Aajiz
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जाने
क्या
क्या
ज़ुल्म
परिंदे
देख
के
आते
हैं
शाम
ढले
पेड़ों
पर
मर्सिया-ख़्वानी
होती
है
Afzal Khan
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सुख़न
का
जोश
कम
होता
नहीं
है
वगरना
क्या
सितम
होता
नहीं
है
भले
तुम
काट
दो
बाज़ू
हमारे
क़लम
का
सर
क़लम
होता
नहीं
है
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Baghi Vikas
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क्या
सितम
करते
हैं
मिट्टी
के
खिलौने
वाले
राम
को
रक्खे
हुए
बैठे
हैं
रावण
के
क़रीब
Asghar Mehdi Hosh
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दिल
तो
है
ख़ारज़ार
गज़ाला
के
इश्क़
में
बंजर
ज़मीं
पे
दिल
की
उगाया
भी
क्या
करें
A R Sahil "Aleeg"
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इस
जहाँ
में
है
फ़क़त
एक
क़ज़ा
सच
बाक़ी
चाहे
एहसास
हो
जज़्बात
हो
झूटे
हैं
सब
A R Sahil "Aleeg"
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किसी
नुजूमी
ने
ये
कहा
था
रहोगे
तन्हा
ही
इश्क़
में
तुम
ये
और
बेहतर
बिछड़
के
तुमने
किया
है
पुख़्ता
यक़ीन
मेरा
A R Sahil "Aleeg"
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नहीं
जिसका
ख़ुदा
भी
इस
जमाने
में
करे
क्या
वो
झुकाए
सर
कहाँ
अपना
A R Sahil "Aleeg"
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तुम
कहो
या
तुम्हारा
कोई
हरीफ़
सच
तो
सच
है
इसे
मानो,
तुम
भी,
वो
भी
A R Sahil "Aleeg"
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