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A R Sahil "Aleeg"
nahin jiska KHuda bhi is jamaane men
nahin jiska KHuda bhi is jamaane men | नहीं जिसका ख़ुदा भी इस जमाने में
- A R Sahil "Aleeg"
नहीं
जिसका
ख़ुदा
भी
इस
जमाने
में
करे
क्या
वो
झुकाए
सर
कहाँ
अपना
- A R Sahil "Aleeg"
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मैं
हूँ
सदियों
से
भटकता
हुआ
प्यासा
दरिया
ऐ
ख़ुदा
कुछ
तो
समुंदर
के
सिवा
दे
मुझ
को
Afzal Ali Afzal
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कहा
था
क्या
और
क्या
बने
हो
अजब
सा
इक
मसअला
बने
हो
हमारी
मर्ज़ी
कहाँ
थी
शामिल
तुम
अपने
मन
से
ख़ुदा
बने
हो
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Ritesh Rajwada
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जीने
का
बस
एक
यही
ढब
अच्छा
है
मेरा
तेरा
सबका
ही
रब
अच्छा
है
बंदा
हो
तो
यार
हमारे
जैसा
हो
सब
कुछ
खोकर
भी
बोले,
सब
अच्छा
है
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Tanoj Dadhich
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ऐ
आसमान
तेरे
ख़ुदा
का
नहीं
है
ख़ौफ़
डरते
हैं
ऐ
ज़मीन
तेरे
आदमी
से
हम
Unknown
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माँ
बाप
और
उस्ताद
सब
हैं
ख़ुदा
की
रहमत
है
रोक-टोक
उन
की
हक़
में
तुम्हारे
नेमत
Altaf Hussain Hali
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तेरे
बग़ैर
ख़ुदा
की
क़सम
सुकून
नहीं
सफ़ेद
बाल
हुए
हैं
हमारा
ख़ून
नहीं
न
हम
ही
लौंडे
लपाड़ी
न
कच्ची
उम्र
का
वो
ये
सोचा
समझा
हुआ
इश्क़
है
जुनून
नहीं
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Shamim Abbas
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क़फस
उदास
है
यारों
सबास
कुछ
तो
कहो
कहीं
तो
बहरे-खुदा
आज
ज़िक्र-ए-यार
चले
Faiz Ahmad Faiz
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मुहब्बत
में
हमने
सियासत
न
की
तभी
इश्क़
में
कोई
बरकत
न
की
उसे
मानता
था
मैं
अपना
ख़ुदा
कभी
उसकी
लेकिन
इबादत
न
की
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RAJAT AWASTHI
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मिरे
गुनाह
की
मुझ
को
सज़ा
नहीं
देता
मिरा
ख़ुदा
कहीं
नाराज़
तो
नहीं
मुझ
से
Shahid Zaki
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ख़ुदा
बचाए
तिरी
मस्त
मस्त
आँखों
से
फ़रिश्ता
हो
तो
बहक
जाए
आदमी
क्या
है
Khumar Barabankvi
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हसरतों
को
कुचल
गया
है
इश्क़
हद
से
आगे
निकल
गया
है
इश्क़
दिल
भी
ख़ाली
है
अब
पतीले
सा
चाय
के
जैसे
जल
गया
है
इश्क़
सूरत-ए-हाल
देखें
क्या
होगी
छोड़
कर
मुझको
कल
गया
है
इश्क़
मैंने
ढाला
था
इश्क़
में
मिसरा
याँ
तो
मिसरे
में
ढल
गया
है
इश्क़
आग
का
इश्क़
था
कि
काग़ज़
का
ये
जो
अश्कों
से
गल
गया
है
इश्क़
हुस्न
की
कितनी
ही
दुकानों
पर
तिफ़्ल
जैसे
मचल
गया
है
इश्क़
फिर
वही
ना-नुकर
रही
उस
की
फिर
से
इस
बार
टल
गया
है
इश्क़
सैकड़ों
लोग
उन
पे
मरते
हैं
उन
को
भी
ख़ूब
फल
गया
है
इश्क़
हाए
ये
धूल
क्यूँ
उदासी
की
मेरे
चेहरे
पे
मल
गया
है
इश्क़
एक
औलाद
की
तरह
साहिल
दस्तरस
से
निकल
गया
है
इश्क़
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A R Sahil "Aleeg"
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अपने
इफ़्फ़त
पे
नाज़
मत
कर
तू
ऐन
जब
हो
अलिफ़
तो
आफ़त
है
A R Sahil "Aleeg"
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ऐन
पे
मरते
हैं
ये
शीन-ओ-काफ़
तब
कहीं
जा
के
इश्क़
बनता
है
A R Sahil "Aleeg"
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हर
ख़ता
करते
हैं
नज़र-अंदाज़
इश्क़
अंधा
कभी
नहीं
होता
A R Sahil "Aleeg"
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ये
तेरा
हर
दफ़ा
हर
बात
पर
यूँँ
यार
कह
देना
मुझे
उस
बे-वफ़ा
की
याद
शिद्दत
से
दिलाती
है
A R Sahil "Aleeg"
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