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A R Sahil "Aleeg"
KHuda mujhko khushi ke saath gham bhi de yahaañ
KHuda mujhko khushi ke saath gham bhi de yahaañ | ख़ुदा मुझको, ख़ुशी के साथ ग़म भी दे यहाँ
- A R Sahil "Aleeg"
ख़ुदा
मुझको,
ख़ुशी
के
साथ
ग़म
भी
दे
यहाँ
नहीं
तो
डर
है
मुझको,
भूल
जाऊँगा
तुझे
- A R Sahil "Aleeg"
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इस
से
पहले
कि
बिछड़
जाएँ
हम
दो
क़दम
और
मिरे
साथ
चलो
मुझ
सा
फिर
कोई
न
आएगा
यहाँ
रोक
लो
मुझको
अगर
रोक
सको
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Nasir Kazmi
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जो
बच
गए
हैं
चराग़
उनको
बचाये
रक्खो
मैं
चाहता
हूँ
हवा
से
रिश्ता
बनाये
रक्खो
Azm Shakri
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हमेशा
यही
भूल
करता
रहा
तेरा
साथ
पाने
को
मरता
रहा
सुनहरे
बहारों
के
मौसम
तले
गुलिस्ताँ
हमारा
बिखरता
रहा
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Ambar
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इस
से
पहले
कि
तुझे
और
सहारा
न
मिले
मैं
तिरे
साथ
हूँ
जब
तक
मिरे
जैसा
न
मिले
Afkar Alvi
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सगी
बहनों
का
जो
रिश्ता
रिश्ता
है
उर्दू
और
हिन्दी
में
कहीं
दुनिया
की
दो
ज़िंदा
ज़बानों
में
नहीं
मिलता
Munawwar Rana
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आ
जाए
कौन
कब
कहाँ
कैसी
ख़बर
के
साथ
अपने
ही
घर
में
बैठा
हुआ
हूँ
मैं
डर
के
साथ
Pratap Somvanshi
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मैं
जंगलों
की
तरफ़
चल
पड़ा
हूँ
छोड़
के
घर
ये
क्या
कि
घर
की
उदासी
भी
साथ
हो
गई
है
Tehzeeb Hafi
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शर्तें
लगाई
जाती
नहीं
दोस्ती
के
साथ
कीजे
मुझे
क़ुबूल
मिरी
हर
कमी
के
साथ
Waseem Barelvi
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जब
तक
जला
ये
हम
भी
जले
इसके
साथ
साथ
जब
बुझ
गया
चराग़
तो
सोना
पड़े
हमें
Abbas Qamar
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तुम्हें
ज़रूर
कोई
चाहतों
से
देखेगा
मगर
वो
आँखें
हमारी
कहाँ
से
लाएगा
तुम्हारे
साथ
ये
मौसम
फ़रिश्तों
जैसा
है
तुम्हारे
बा'द
ये
मौसम
बहुत
सताएगा
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Bashir Badr
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शिकायत
तो
बहुत
है
और
सितम
ये,
कर
नहीं
सकता
A R Sahil "Aleeg"
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यहाँ
जीना
भी
मुश्किल
है
यहाँ
मरना
भी
है
मुश्किल
फ़क़त
इतना
सा
ही
है
इश्क़
का
अंजाम
लिख
देना
A R Sahil "Aleeg"
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इश्क़
के
नुक़्ते
ने
ढाया
है
जो
कहर
ज़िस्तो-क़ज़ा
के
ज़ेर-ज़बर
ख़त्म
हुए
A R Sahil "Aleeg"
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हर
कोई
कह
रहा
है
दुनिया
में
की
नहीं
है
वफ़ा
ग़ज़ाला
ने
A R Sahil "Aleeg"
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ख़ुद-ब-ख़ुद
हालात
कब
कोई
सुधरते
हैं
यहाँ
पर
कोशिशों
से
ही
सुधरते
आए
हैं
हालात
अब
तक
A R Sahil "Aleeg"
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