chaara-gar bhi haal-e-dil par mire hairaan ho ga.e | चारा-गर भी हाल-ए-दिल पर मेरे हैराँ हो गए

  - A R Sahil "Aleeg"
चारा-गरभीहाल-ए-दिलपरमेरेहैराँहोगए
ज़ख़्मदिलकेख़ुद-ब-ख़ुदजबदिलकादरमाँहोगए
ज़िंदगीकेमरहलेसबसचमेंआसाँहोगए
उनसेेनज़रेंक्यामिलीहमगुल-बदामाँहोगए
सहनगुलशनसेहुईकुछइसतरहरुख़सतबहार,
शाख़-ए-गुल,बर्ग-ओ-समर,लम्हेमेंवीराँहोगए
भाई-चारेकामिलाउनसेेमुझेऐसासिला,
तर-ब-तरख़ूँसेमिरेदस्त-ओ-गिरेबाँहोगए
रफ़्ता-रफ़्तामिटगईआवारगीकीजुस्तजू,
जबशनाशा-ए-दरो-दीवार-ए-ज़िन्दाँहोगए
जिसकिसीनेदेखा,उसनेखोलकरदिल,दाददी
वारग़मकेदिलपेयूँँकार-ए-नुमायाँहोगए
  - A R Sahil "Aleeg"
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