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A R Sahil "Aleeg"
kal saba kah gaii vo karti hai
kal saba kah gaii vo karti hai | कल सबा कह गई, वो करती है
- A R Sahil "Aleeg"
कल
सबा
कह
गई,
वो
करती
है
ज़िक्र
अब
भी
तेरा
सहेली
से
- A R Sahil "Aleeg"
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बात
कोई
नहीं
जुदाई
की
दिल
ने
बस
दिल
से
बे-वफ़ाई
की
कूचे-कूचे
में
हो
गए
बदनाम
इश्क़
में
हमने
ये
कमाई
की
हमने
भी
वाह
कह
के
टाल
दिया
उसने
जब
जब
भी
कज-अदाई
की
हार
बैठे
जो
सब
मुख़ालिफ़
तो
दोस्तों
ने
ही
जग
हँसाई
की
हम
क़फ़स
में
भी
सर-बुलंद
रहे
इल्तिजा
की
नहीं
रिहाई
की
मुझको
उस
मेहरबाँ
ने
देकर
दिल
लाज
रखली
मेरी
गदाई
की
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A R Sahil "Aleeg"
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उस
को
होता
है
हर
इक
रोज़
नए
शख़्स
से
इश्क़
उस
के
इस
शौक़
पे
अब
ख़ाक
है
हैराँ
होना
A R Sahil "Aleeg"
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कुछ
तो
बर्बाद
इश्क़
ने
भी
किया
कुछ
मुक़द्दर
का
भी
क़ुसूर
है
ये
A R Sahil "Aleeg"
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इंतिज़ार-ए-इश्क़
'साहिल'
कर
रहे
हो
क्यूँ
अभी
भी
कल
की
शब
वो
बन
गई
है
ग़ैर
की
दुल्हन
ख़ुशी
से
A R Sahil "Aleeg"
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ये
इंसाँ
भला
भीख
कैसे
यहाँ
माँग
लेते
हैं
मुझे
तो
ख़ुदास
दु'आ
माँगते
शर्म
आती
है
A R Sahil "Aleeg"
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