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Arkam zahid
vo kahaanii ka ye kirdaar badal daalenge
vo kahaanii ka ye kirdaar badal daalenge | वो कहानी का ये किरदार बदल डालेंगे
- Arkam zahid
वो
कहानी
का
ये
किरदार
बदल
डालेंगे
सच
जो
बोलूँगा
तो
अख़बार
बदल
डालेंगे
दाग़
चेहरे
पे
है
लेकिन
ये
भला
कौन
करे
सच
जो
बोला
तो
तरफ़दार
बदल
डालेंगे
- Arkam zahid
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जिसने
भी
इस
ख़बर
को
सुना
सर
पकड़
लिया
कल
एक
दिए
ने
आंधी
का
कॉलर
पकड़
लिया
Munawwar Rana
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तुम
पर
इक
दिन
मरते
मरते
मर
जाना
है,
दीवाने
को
कहाँ
ख़बर
है
घर
जाना
है
एक
शब्द
तुमको
अंधेरे
का
खौफ़
दिलाकर,
बाद
में
ख़ुद
भी
जान
बूझकर
डर
जाना
है
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Vishal Singh Tabish
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वो
तिरे
नसीब
की
बारिशें
किसी
और
छत
पे
बरस
गईं
दिल-ए-बे-ख़बर
मिरी
बात
सुन
उसे
भूल
जा
उसे
भूल
जा
Amjad Islam Amjad
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मिरी
सुब्ह
का
यूँँ
भी
इज़हार
हो
पियाला
हो
कॉफ़ी
का
अख़बार
हो
कोई
जुर्म
साबित
न
हो
उसका
फिर
जो
तेरी
हँसी
में
गिरफ़्तार
हो
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Swapnil Tiwari
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हमारे
शहर
के
लोगों
का
अब
अहवाल
इतना
है
कभी
अख़बार
पढ़
लेना
कभी
अख़बार
हो
जाना
Ada Jafarey
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इश्क़
क्या
है
ख़ूब-सूरत
सी
कोई
अफ़वाह
बस
वो
भी
मेरे
और
तुम्हारे
दरमियाँ
उड़ती
हुई
Nomaan Shauque
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आ
जाए
कौन
कब
कहाँ
कैसी
ख़बर
के
साथ
अपने
ही
घर
में
बैठा
हुआ
हूँ
मैं
डर
के
साथ
Pratap Somvanshi
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दोस्त
दिल
रखने
को
करते
हैं
बहाने
क्या
क्या
रोज़
झूटी
ख़बर-ए-वस्ल
सुना
जाते
हैं
Lala Madhav Ram Jauhar
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सब
सेे
बेज़ार
हो
गया
हूँ
मैं
ज़ेहनी
बीमार
हो
गया
हूँ
मैं
कोई
अच्छी
ख़बर
नहीं
मुझ
में
यानी
अख़बार
हो
गया
हूँ
मैं
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Mehshar Afridi
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क्या
ख़बर
कौन
था
वो,
और
मेरा
क्या
लगता
था
जिस
सेे
मिलकर
मुझे,
हर
शख़्स
बुरा
लगता
था
Tehzeeb Hafi
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तुम्हारा
साथ
होगा
तो
सफ़र
आसान
होगा
फिर
नमाज़
-ए-
इश्क़
होगी
फिर
मेरा
ईमान
होगा
फिर
Arkam zahid
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हर
ख़ुशी
ग़म
के
सहारे
कौन
है
इनका
यहाँ
उम्र
के
दोनों
किनारे
कौन
है
थमता
यहाँ
बाँट
ली
बच्चों
ने
दौलत
पर
यहीं
तो
रह
गए
बाप
माँ
किसको
पुकारे
कौन
है
अपना
यहाँ
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Arkam zahid
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था
तो
वो
दिल
ही
तुम्हारा
अब
है
शायद
भर
गया
बाँध
कर
सामान
अपना
इश्क़
अपने
घर
गया
Arkam zahid
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ग़म
की
चादर
को
सर
से
उठा
कर
कहा
फिर
मेरे
दिल
को
उसने
लुभा
कर
कहा
कुछ
भी
रहता
नहीं
है
हमेशा
को
अब
उसने
चाहत
लिखा
फिर
मिटा
कर
कहा
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Arkam zahid
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था
तो
वो
दिल
ही
तुम्हारा
अब
है
शायद
भर
गया
बाँध
कर
सामान
अपना
इश्क़
अपने
घर
गया
Arkam zahid
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