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anupam shah
tumhe to yuñ hi kismat se mohabbat mil gayi thii naagar mehnat se milti to juda hone ka gham hota
tumhe to yuñ hi kismat se mohabbat mil gayi thii naagar mehnat se milti to juda hone ka gham hota | तुम्हें तो यूँँ ही किस्मत से मोहब्बत मिल गई थी ना
- anupam shah
तुम्हें
तो
यूँँ
ही
किस्मत
से
मोहब्बत
मिल
गई
थी
ना
अगर
मेहनत
से
मिलती
तो
जुदा
होने
का
ग़म
होता
- anupam shah
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उदासी
चल
कहीं
चलते
हैं
दोनों
पिएँगे
चाय
और
बातें
करेंगे
Gaurav Singh
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वक़्त
अच्छा
भी
आएगा
'नासिर'
ग़म
न
कर
ज़िंदगी
पड़ी
है
अभी
Nasir Kazmi
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ये
किस
मक़ाम
पे
लाई
है
ज़िंदगी
हम
को
हँसी
लबों
पे
है
सीने
में
ग़म
का
दफ़्तर
है
Hafeez Banarasi
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और
भी
दुख
हैं
ज़माने
में
मोहब्बत
के
सिवा
राहतें
और
भी
हैं
वस्ल
की
राहत
के
सिवा
Faiz Ahmad Faiz
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जौन
तुम्हें
ये
दौर
मुबारक,
दूर
ग़म-ए-अय्याम
से
हो
एक
पागल
लड़की
को
भुला
कर
अब
तो
बड़े
आराम
से
हो
Jaun Elia
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तू
तो
वाक़िफ़
है
रिवाज़-ए-ग़म
से
इसके
इश्क़
तो
तेरा
भी
ये
पहला
नहीं
है
Siddharth Saaz
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कैसा
दिल
और
इस
के
क्या
ग़म
जी
यूँँ
ही
बातें
बनाते
हैं
हम
जी
Jaun Elia
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मैं
ज़िन्दगी
में
आज
पहली
बार
घर
नहीं
गया
मगर
तमाम
रात
दिल
से
माँ
का
डर
नहीं
गया
बस
एक
दुख
जो
मेरे
दिल
से
उम्र
भर
न
जाएगा
उसको
किसी
के
साथ
देख
कर
मैं
मर
नहीं
गया
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Tehzeeb Hafi
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अपनी
हालत
का
ख़ुद
एहसास
नहीं
है
मुझ
को
मैं
ने
औरों
से
सुना
है
कि
परेशान
हूँ
मैं
Aasi Uldani
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जिसकी
ख़ातिर
कितनी
रातें
सुलगाई
जिसके
दुख
में
दिल
जाने
क्यूँ
रोता
है
इक
दिन
हम
सेे
पूछ
रही
थी
वो
लड़की
प्यार
में
कोई
पागल
कैसे
होता
है
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Ritesh Rajwada
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मोहब्बत
में
इज़ाफ़ा
हो
रहा
है
मगर
ख़र्चा
ज़ियादा
हो
रहा
है
anupam shah
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एक
तो
हम
ज़रा
ख़राब
नहीं
ये
भी
तो
कोई
कम
अज़ाब
नहीं
कामयाबी
की
कोई
कोशिश
है
और
हम
उस
में
कामयाब
नहीं
रूठ
जाती
है
रातरानी
जो
ख़ुशबुएँ
और
भी
ख़राब
नहीं
एक
तेरी
नज़र
से
डरता
हूँ
वैसे
ये
भी
तो
कम
शराब
नहीं
और
कितने
फ़ितूर
तारी
हैं,
एक
से
ज़िंदगी
ख़राब
नहीं
मौत
आएगी
जान
जाएगी
शम'अ
बुझती
है
आफ़ताब
नहीं
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anupam shah
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इस
तरह
से
तुम्हें
मैं
ज़िंदगी
में
लाऊँगा
गीत
पर
गीत
लिख
के
रोज़
तुझको
गाऊँगा
एक
शायर
ने
तेरा
नाम
लिख
लिया
दिल
पे
और
फिर
क्या
हसीं
ग़ज़ल
तुझे
सुनाऊँगा
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anupam shah
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खुले
लब
और
दो
आँखें
ज़रा
सी
अधखुली
सी
थीं
कि
ऐसे
हादसे
में
मैं
गुज़र
जाता
तो
अच्छा
था
anupam shah
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कहानी
नई
रोज़
लिखकर
मिटानी
न
आसान
है
ये
मेरी
ज़िंदगानी
ज़रा
सोचकर
इश्क़
करना
यहाँ
तुम
रिवायत
पड़ेगी
ये
तुमको
निभानी
ये
नाज़ुक
ग़ज़ल
और
शराफ़त
के
क़िस्से
किसी
की
हैं
बातें
किसी
की
कहानी
कई
रोज़
के
बाद
उन
सेे
मिले
जब
न
मुँह
से
निकाली
वो
बातें
पुरानी
करो
याद
मौसम
ज़रा
वो
पुराना
वो
भीगे
बदन
पे
पिघलता
सा
पानी
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anupam shah
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