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anupam shah
lo khud mukhtar hokar dekhte hain
lo khud mukhtar hokar dekhte hain | लो ख़ुद मुख़्तार होकर देखते हैं
- anupam shah
लो
ख़ुद
मुख़्तार
होकर
देखते
हैं
कि
अपने
यार
होकर
देखते
हैं
बचे
बर्बाद
होने
से
हैं
अब
तक
चलो
इस
बार
होकर
देखते
हैं
यहाँ
से
मसअला
ये
हल
न
होगा
इसे
उस
पार
होकर
देखते
हैं
कोई
ख़तरा
नहीं
है
दुश्मनी
में
किसी
का
प्यार
होकर
देखते
हैं
- anupam shah
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मैं
चाहता
यही
था
सब
चाह
ख़त्म
हो
अब
फिर
चाहकर
तुम्हें
बदला
ये
ख़याल
मेरा
Abhay Aadiv
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अगर
रक़ीब
न
होते
तो
दोस्त
होते
आप
हमारे
शौक़,
ख़यालात
एक
जैसे
हैं
Amulya Mishra
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भुला
दो
रंग
नफ़रत
के
,
तिरंगा
हाथ
में
लेकर
दिखा
दो
तीन
रंगों
का
सभी
को
प्यार
होली
में
Vijay Anand Mahir
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दुश्मनी
का
सफ़र
इक
क़दम
दो
क़दम
तुम
भी
थक
जाओगे
हम
भी
थक
जाएँगे
Bashir Badr
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जो
दोस्त
हैं
वो
माँगते
हैं
सुलह
की
दु'आ
दुश्मन
ये
चाहते
हैं
कि
आपस
में
जंग
हो
Lala Madhav Ram Jauhar
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इस
आ
समाँ
को
मुझ
सेे
है
क्या
दुश्मनी
"अली"?
भेजूं
अगर
दु'आ
भी
तो
सर
पर
लगे
मुझे
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Ali Rumi
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मुझ
से
नफ़रत
है
अगर
उस
को
तो
इज़हार
करे
कब
मैं
कहता
हूँ
मुझे
प्यार
ही
करता
जाए
Iftikhar Naseem
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ज़िन्दगी,
यूँँ
भी
गुज़ारी
जा
रही
है
जैसे,
कोई
जंग
हारी
जा
रही
है
जिस
जगह
पहले
से
ज़ख़्मों
के
निशां
थे
फिर
वहीं
पे
चोट
मारी
जा
रही
है
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Azm Shakri
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अगर
लगता
है
वो
क़ाबिल
नहीं
है
तो
रिश्ता
तोड़ना
मुश्किल
नहीं
है
रक़ीब
आया
है
मेरे
शे'र
सुनने
तो
अब
ये
जंग
है
महफ़िल
नहीं
है
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Tanoj Dadhich
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मौत
ही
इंसान
की
दुश्मन
नहीं
ज़िंदगी
भी
जान
ले
कर
जाएगी
Arsh Malsiyani
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मुझे
हर
हाथ
ने
कुछ
इस
तरह
से
अब
तराशा
है
न
मुझ
में
रह
गया
हूँ
मैं
कहीं
बाक़ी
मिरे
जैसा
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anupam shah
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तुम्हें
मैं
बस
तुम्हारी
सम्त
रखकर
लौट
आऊँगा
मुझे
मालूम
है
जो
दर्द
है
रस्ता
भटकने
का
anupam shah
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आजकल
का
आब-ओ-दाना
और
है
जो
हुआ
उसका
बताना
और
है
दिल-लगी
करना
सताना
और
है
इश्क़
लेना
घर
बसाना
और
है
क़हक़हों
का
शोर
है
चारों
तरफ़
चल
रहा
दिल
में
तराना
और
है
ये
वफ़ा
या
बे-वफ़ाई
सा
नहीं
आपका
नज़रें
चुराना
और
है
कश्तियों
में
पाँव
धोना
और
है
बीच
में
फिर
डूब
जाना
और
है
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anupam shah
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शराबों
से
ख़ुमारी
आ
रही
है
नशा
तेरा
उतरता
जा
रहा
है
anupam shah
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किसी
पत्थर
की
बस्ती
में
वो
लम्हा
छुप
के
बैठा
है
अभी
तो
कुछ
बरस
लग
जाएँगे
दीवार
ढहने
में
anupam shah
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