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anupam shah
kise itni kahaanii chahiye thii
kise itni kahaanii chahiye thii | किसे इतनी कहानी चाहिए थी
- anupam shah
किसे
इतनी
कहानी
चाहिए
थी
मुहब्बत
जावेदानी
चाहिए
थी
वही
इक
बात
कर
देगी
परेशाँ
वही
जो
भूल
जानी
चाहिए
थी
उसे
आख़िर
में
बस
शिकवे
दिखे
थे
मुहब्बत
याद
आनी
चाहिए
थी
- anupam shah
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जो
बिस्मिल
बना
दे
वो
क़ातिल
तबस्सुम
जो
क़ातिल
बना
दे
वो
दिलकश
नज़ारा
मोहब्बत
का
भी
खेल
नाज़ुक
है
कितना
नज़र
मिल
गई
आप
जीते
मैं
हारा
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Nushur Wahidi
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भाई
बहनों
की
मोहब्बत
का
नशा
मत
पूछिए
बे-तकल्लुफ़
हो
गए
तो
गुदगुदी
तक
आ
गए
Iftikhar Falak Kazmi
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मुझे
उस
सेे
मुहब्बत
सच
बड़ी
महँगी
पड़ेगी
अकेलेपन
से
उसने
इश्क़
ऐसा
कर
लिया
है
Anukriti 'Tabassum'
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कितने
हसीं
हो
माशा-अल्लाह
तुम
पे
मोहब्बत
ख़ूब
जचेगी
Zubair Ali Tabish
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इक
शहंशाह
ने
दौलत
का
सहारा
ले
कर
हम
ग़रीबों
की
मोहब्बत
का
उड़ाया
है
मज़ाक़
Sahir Ludhianvi
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मुहब्बत
आपसे
करना
कभी
आसाँ
नहीं
था
पर
बिना
कश्ती
के
दरिया
पार
करना
शौक़
है
मेरा
Tanoj Dadhich
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दिल
में
जो
मोहब्बत
की
रौशनी
नहीं
होती
इतनी
ख़ूब-सूरत
ये
ज़िंदगी
नहीं
होती
Hastimal Hasti
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मुहब्बत
रास
आ
जाए
हमें
ये
सोचकर
हम
ने
जिसे
भी
चाहा
है
पहली
मुहब्बत
की
तरह
चाहा
Prashant Rao chourase
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देख
मोहब्बत
का
दस्तूर
तू
मुझ
से
मैं
तुझ
से
दूर
कोशिश
लाज़िम
है
प्यारे
आगे
जो
उसको
मंज़ूर
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Nasir Kazmi
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सँभलने
के
लिए
कर
ली
मुहब्बत
मगर
इस
में
फिसलना
चाहिए
था
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Divy Kamaldhwaj
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अकेली
रात
में
आँखों
को
मेरी
एक
सपना
दे
बुरा
दे
ख़्वाब
मुझको
तू
मगर
तू
ख़्वाब
अपना
दे
anupam shah
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जाने
का
जो
ग़म
होता
है
तेज
कभी
मद्धम
होता
है
तुम
सेे
बिछड़कर
जाना
हमने
आँख
का
आँसू
नम
होता
है
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anupam shah
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दु'आ
अपनी
भी
ख़ातिर
इस
तरह
कुछ
माँग
ली
मैंने
ये
चाहा
है
कि
तेरे
चाहने
वाले
सभी
ख़ुश
हो
anupam shah
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हुआ
हम
को
भला
क्या
ग़म
चलो
हम
भी
नहीं
कहते
अरे
तुम
भी
तो
कोई
बात
सीधी-सी
नहीं
कहते
निगाहों
को
तिरी
पढ़ना
अजब
सी
कश्मकश
है
ये
न
चुप
रहते
हैं
दोनों
और
ये
कुछ
भी
नहीं
कहते
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anupam shah
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तू
ही
हर
ज़ख़्म
देता
है
तू
ही
मरहम
लगाता
है
बड़ा
बेदिल
ख़ुदा
है
तू
ख़ुदा
होना
जताता
है
ये
वादे
प्यार
के
फूलों
से
नाज़ुक
क्यूँ
बनाता
है
वफ़ा
की
राह
में
कांटे
ही
कांटे
क्यूँ
बिछाता
है
ज़बाँ
ने
तो
तेरी
इक
उम्र
मुझ
सेे
झूठ
बोला
है
मुझे
तो
बस
गिला
तेरी
निगाहों
का
सताता
है
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anupam shah
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