baantkar roti ke tukḍon ko tu kh | बाँटकर रोटी के टुकड़ों को तू खाना सीख ले

  - anupam shah
बाँटकररोटीकेटुकड़ोंकोतूखानासीखले
तूमेरीजाँज़िन्दगीमेंमुस्कुरानासीखले
साहिलोंपेवक़्तगुज़रेगानहींहरदमयूँँही
तूसमुंदरकीतरहसेआनाजानासीखले
चाँद-तारोंसेकभीरौशननहींहोतेमकाँ
तूचराग़ोंकोयूँँरातोंमेंजलानासीखले
अश्क़हैं!आएँगे!आँखोंकीयहीतासीरहै
बारिशोंमेंडूबकरफिरभीगजानासीखले
मुफ़लिसीदिलकोकभीमहसूसहोनेलगे
इश्क़करनेकीअदातूजान-ए-जानाँसीखले
  - anupam shah
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