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Anuj kumar
Zindagi apni hum guzaar chale
ज़िन्दगी अपनी हम गुज़ार चले
- Anuj kumar
ज़िन्दगी
अपनी
हम
गुज़ार
चले
सब
नशा
इश्क़
का
उतार
चले
कोई
हसरत
नहीं
हमें
ख़ुदस
हम
सभी
हसरतों
के
पार
चले
सबकी
सब
नफ़रतों
को
दिल
से
लगा
है
हमारा
ख़ुदा
पुकार
चले
उस
गली
में
नहीं
बचा
कुछ
क्यूँँ
उस
गली
हम
यूँँ
बार-बार
चले
जो
निभा
सकते
थे
निभा
दी
फिर
मन
में
लेके
वो
क्यूँँ
गुबार
चले
मिल
गया
दोस्त
एक
उसका
हम
बोझ
दिल
का
सभी
उतार
चले
वो
मिले
या
नहीं
मिले
हमको
उसकी
क़िस्मत
को
हम
सँवार
चले
दिल
के
टुकड़े
किए
हैं
जिसने
यार
हम
तो
उस
पे
ही
जाँ
निसार
चले
मिलती
हैं
सब
को
मन्ज़िलें
तो
कभी
तीर-ए-दुश्मन
भले
हज़ार
चले
यार
आएँ
न
आएँ
दोस्त
सभी
ओर
से
अपनी
हम
गुहार
चले
अब
बचा
कुछ
नहीं
ख़ला
के
सिवा
अब
चलो
हम
यहाँ
से
यार
चले
चलते
हैं
ज़िन्दगी
लिए
ऐसे
लाश
लेके
जो
लोग
चार
चले
ज़िन्दगी
इसलिए
भी
जी
कुछ
तो
ज़िल्लतों
का
भी
रोज़गार
चले
चाह
रंग-ए-सुखन
की
थी
लेकिन
हो
के
हम
याँ
से
अश्क़-बार
चले
वो
सर-ए-रहगुज़र
थी
मिलती
सो
दिल-ए-हर
वो
कली
निहार
चले
शहर
पहले
पहल
हुए
जो
नाश
सब
सेे
पहले
तो
शहरयार
चले
जो
बिगाड़ी
ज़बान
हमने
अभी
तो
ज़बान
अपनी
सब
सुधार
चले
की
मदद
दिल
से
सबकी
मैंने
तो
सब
मिरी
बार
बस
विचार
चले
हुक़्म
उसका
मिला
चले
यूँँ
लोग
जैसे
लंबी
कोई
क़तार
चले
रास
आई
नहीं
ये
दुनिया
सो
छोड़
दुनिया
'अनुज
कुमार'
चले
- Anuj kumar
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बात
आ
गई
थी
आज
जान
मेरी
जान
पर
वो
मिली
थी
मुझ
को
इक
किताब
की
दुकान
पर
दिल
धड़क
उठा
ये
इतनी
ज़ोर-ज़ोर
से
कि
फिर
आ
न
पाया
लफ़्ज़
एक
भी
मिरी
ज़बान
पर
क्या
नहीं
दिखाई
देगा
उस
को
देखना
मिरा
क्या
नहीं
लगेगा
तीर-ए-दिल
कभी
निशान
पर
उसकी
ख़ामुशी
के
मानी
क्या
हैं
क्या
नहीं
ये
रोज़
सोचता
हूँ
मैं
नज़र
उठाए
आसमान
पर
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मेरे
सीने
में
अरमाँ
की
इक
लहर
तब
झूमती
है
जब
दिखाकर
मुझे
एक
बच्चे
को
वो
चूमती
है
Anuj kumar
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जो
मिला
नहीं
उसे
तू
ख़्वाब
सा
तलाश
कर
अब
इलाज
यार
जा
किताब
सा
तलाश
कर
है
सवाल
ज़िन्दगी
का
ज़िन्दगी
में
गर
तेरे
तब
जवाब
कोई
ला
जवाब
सा
तलाश
कर
रौशनी
की
चाह
है
तुझे
तो
कर
ये
काम
बस
इल्म
ख़ामुशी
से
आफ़ताब
सा
तलाश
कर
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क्या
बनाई
है
दुनिया
ख़ुदा
बे-बसी
के
लिए
कितना
मुश्किल
है
जीना
यहाँ
आदमी
के
लिए
Anuj kumar
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इश्क़
देगा
सज़ा
ये
पता
है
मुझे
वो
करेगा
जफ़ा
ये
पता
है
मुझे
रोग
ही
मुझको
ऐसा
लगा
क्या
करूँँ
जान
लेगी
दवा
ये
पता
है
मुझे
कर
तुझे
जो
मिरे
साथ
करना
है
कर
पास
है
अब
ख़ुदा
ये
पता
है
मुझे
कर
रहा
हूँ
भला
जो
सभी
का
यहाँ
सो
मिलेगी
क़ज़ा
ये
पता
है
मुझे
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Anuj kumar
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