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Anuj kumar
mere seene men armaan kii ik lehar tab jhoomti hai
mere seene men armaan kii ik lehar tab jhoomti hai | मेरे सीने में अरमाँ की इक लहर तब झूमती है
- Anuj kumar
मेरे
सीने
में
अरमाँ
की
इक
लहर
तब
झूमती
है
जब
दिखाकर
मुझे
एक
बच्चे
को
वो
चूमती
है
- Anuj kumar
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क्या
बनाई
है
दुनिया
ख़ुदा
बे-बसी
के
लिए
कितना
मुश्किल
है
जीना
यहाँ
आदमी
के
लिए
Anuj kumar
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जो
मिला
नहीं
उसे
तू
ख़्वाब
में
तलाश
कर
अब
इलाज
यार
जा
किताब
में
तलाश
कर
Anuj kumar
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तो
न
आया
असर
उस
की
इबादत
में
हार
के
रो
रहा
है
वो
मुहब्बत
में
हो
गईं
सच
सभी
बातें
कहावत
की
छोड़
के
सब
चले
जाते
हैं
गु़र्बत
में
याद
आते
नहीं
हो
तुम
कभी
हम
को
बस
यही
याद
अब
करते
हैं
फु़र्क़त
में
बात
ये
इक
दिल-ए-नादाँ
समझ
ले
तू
इश्क़
रहता
नहीं
है
सब
की
क़िस्मत
में
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इश्क़
देगा
सज़ा
ये
पता
है
मुझे
वो
करेगा
जफ़ा
ये
पता
है
मुझे
रोग
ही
मुझको
ऐसा
लगा
क्या
करूँँ
जान
लेगी
दवा
ये
पता
है
मुझे
कर
तुझे
जो
मिरे
साथ
करना
है
कर
पास
है
अब
ख़ुदा
ये
पता
है
मुझे
कर
रहा
हूँ
भला
जो
सभी
का
यहाँ
सो
मिलेगी
क़ज़ा
ये
पता
है
मुझे
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ज़िन्दगी
अपनी
हम
गुज़ार
चले
सब
नशा
इश्क़
का
उतार
चले
कोई
हसरत
नहीं
हमें
ख़ुदस
हम
सभी
हसरतों
के
पार
चले
सबकी
सब
नफ़रतों
को
दिल
से
लगा
है
हमारा
ख़ुदा
पुकार
चले
उस
गली
में
नहीं
बचा
कुछ
क्यूँँ
उस
गली
हम
यूँँ
बार-बार
चले
जो
निभा
सकते
थे
निभा
दी
फिर
मन
में
लेके
वो
क्यूँँ
गुबार
चले
मिल
गया
दोस्त
एक
उसका
हम
बोझ
दिल
का
सभी
उतार
चले
वो
मिले
या
नहीं
मिले
हमको
उसकी
क़िस्मत
को
हम
सँवार
चले
दिल
के
टुकड़े
किए
हैं
जिसने
यार
हम
तो
उस
पे
ही
जाँ
निसार
चले
मिलती
हैं
सब
को
मन्ज़िलें
तो
कभी
तीर-ए-दुश्मन
भले
हज़ार
चले
यार
आएँ
न
आएँ
दोस्त
सभी
ओर
से
अपनी
हम
गुहार
चले
अब
बचा
कुछ
नहीं
ख़ला
के
सिवा
अब
चलो
हम
यहाँ
से
यार
चले
चलते
हैं
ज़िन्दगी
लिए
ऐसे
लाश
लेके
जो
लोग
चार
चले
ज़िन्दगी
इसलिए
भी
जी
कुछ
तो
ज़िल्लतों
का
भी
रोज़गार
चले
चाह
रंग-ए-सुखन
की
थी
लेकिन
हो
के
हम
याँ
से
अश्क़-बार
चले
वो
सर-ए-रहगुज़र
थी
मिलती
सो
दिल-ए-हर
वो
कली
निहार
चले
शहर
पहले
पहल
हुए
जो
नाश
सब
सेे
पहले
तो
शहरयार
चले
जो
बिगाड़ी
ज़बान
हमने
अभी
तो
ज़बान
अपनी
सब
सुधार
चले
की
मदद
दिल
से
सबकी
मैंने
तो
सब
मिरी
बार
बस
विचार
चले
हुक़्म
उसका
मिला
चले
यूँँ
लोग
जैसे
लंबी
कोई
क़तार
चले
रास
आई
नहीं
ये
दुनिया
सो
छोड़
दुनिया
'अनुज
कुमार'
चले
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