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Anshika Shukla
ye kehne ki ijaazat chahiye thii
ye kehne ki ijaazat chahiye thii | ये कहने की इजाज़त चाहिए थी
- Anshika Shukla
ये
कहने
की
इजाज़त
चाहिए
थी
हमें
थोड़ी
रियायत
चाहिए
थी
सज़ा
का
हुक्म
सर
आँखों
पे
है
बस
हमें
थोड़ी
सी
मोहलत
चाहिए
थी
- Anshika Shukla
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ख़ूब-सूरत
ये
मोहब्बत
में
सज़ा
दी
उसने
फिर
गले
मिलके
मेरी
उम्र
बढ़ा
दी
उसने
Manzar Bhopali
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मिन्नतें
करता
था
रुक
जाओ
मेरा
कोई
नहीं
मेरे
रोके
से
मगर
कौन
रुका
कोई
नहीं
बेवफ़ाई
को
बड़ा
जुर्म
बताने
वाले
याद
है
तूने
भी
चल
छोड़
हटा
कोई
नहीं
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Khan Janbaz
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आज
पैवंद
की
ज़रूरत
है
ये
सज़ा
है
रफ़ू
न
करने
की
Fahmi Badayuni
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दिल
में
किसी
के
राह
किए
जा
रहा
हूँ
मैं
कितना
हसीं
गुनाह
किए
जा
रहा
हूँ
मैं
Jigar Moradabadi
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मुझे
पहले
पहल
लगता
था
ज़ाती
मसअला
है
मैं
फिर
समझा
मोहब्बत
क़ायनाती
मसअला
है
परिंदे
क़ैद
हैं
तुम
चहचहाहट
चाहते
हो
तुम्हें
तो
अच्छा
ख़ासा
नफ़सयाती
मसअला
है
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Umair Najmi
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हसीन
लड़की
से
दिल
लगाना
भी
इक
ख़ता
है
मुझे
पता
है
अगर
सज़ा
में
मिले
क़ज़ा
तो
अलग
मज़ा
है
मुझे
पता
है
Jatin shukla
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बिछड़ते
वक़्त
भी
हिम्मत
नहीं
जुटा
पाया
कभी
भी
उस
को
गले
से
नहीं
लगा
पाया
किसी
को
चाहते
रहने
की
सज़ा
पाई
है
मैं
चार
साल
में
लड़की
नहीं
पटा
पाया
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Shadab Asghar
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सज़ा
सच
बोलने
की
यह
मिली
है
सभी
ने
कर
लिया
हम
से
किनारा
Meem Alif Shaz
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एक
मुद्दत
से
परिंदे
की
तरह
ये
क़ैद
है
रूह
मेरे
जिस्म
से
'क़ासिद'
रिहा
होती
नहीं
Gurbir Chhaebrra
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उम्र-भर
के
सज्दों
से
मिल
नहीं
सकी
जन्नत
ख़ुल्द
से
निकलने
को
इक
गुनाह
काफ़ी
है
Ambreen Haseeb Ambar
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इतना
लुटे
कि
हिज्र
मनाया
नहीं
गया
हम
सेे
कभी
पलट
के
बुलाया
नहीं
गया
आँखों
से
आरज़ू
तो
गई
ख़्वाब
भी
गए
तेरा
तो
एक
वार
भी
ज़ाया'
नहीं
गया
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Anshika Shukla
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चार
किताबों
की
ख़ुशबू
पी
लेते
हैं
तुम
बोलो
मय-ख़ाने
से
क्या
होता
है
Anshika Shukla
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तुझको
आँखों
में
बसाने
का
सिला
क्या
होगा
ऐसे
मंज़र
से
दिवाने
को
गिला
क्या
होगा
Anshika Shukla
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रफ़्ता
रफ़्ता
साथ
मेरे
चल
दोगे
क्या
चल
दो
ना
घबराने
से
क्या
होता
है
Anshika Shukla
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तुम
तो
बात
समझ
सकते
हो
हर
लम्हात
समझ
सकते
हो
मेरे
साथ
वहाँ
क्या
गुज़रा
बीती
रात
समझ
सकते
हो
आँखें
नम
होंठों
पर
चुप्पी
ये
जज़्बात
समझ
सकते
हो
अब
वो
कुछ
भी
नहीं
कहेगी
एहसासात
समझ
सकते
हो
तुमने
उसके
ख़्वाब
मिटाए
अपनी
ज़ात
समझ
सकते
हो
क़ातिल
बन
जाती
है
कैसे
हर
बारात
समझ
सकते
हो
उसने
मुझको
इश्क़
दिया
था
या
खै़रात
समझ
सकते
हो
हम
भीगे
हैं
आँसू
से
पर
तुम
बरसात
समझ
सकते
हो
जिस्म
की
लत
कुछ
ऐसी
है
ना
दिन
को
रात
समझ
सकते
हो
दूर
करोगे
तुम
भी
कह
कर
तुम
हालात
समझ
सकते
हो
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Anshika Shukla
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