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Anshika Shukla
tum to baat samajh sakte ho
tum to baat samajh sakte ho | तुम तो बात समझ सकते हो
- Anshika Shukla
तुम
तो
बात
समझ
सकते
हो
हर
लम्हात
समझ
सकते
हो
मेरे
साथ
वहाँ
क्या
गुज़रा
बीती
रात
समझ
सकते
हो
आँखें
नम
होंठों
पर
चुप्पी
ये
जज़्बात
समझ
सकते
हो
अब
वो
कुछ
भी
नहीं
कहेगी
एहसासात
समझ
सकते
हो
तुमने
उसके
ख़्वाब
मिटाए
अपनी
ज़ात
समझ
सकते
हो
क़ातिल
बन
जाती
है
कैसे
हर
बारात
समझ
सकते
हो
उसने
मुझको
इश्क़
दिया
था
या
खै़रात
समझ
सकते
हो
हम
भीगे
हैं
आँसू
से
पर
तुम
बरसात
समझ
सकते
हो
जिस्म
की
लत
कुछ
ऐसी
है
ना
दिन
को
रात
समझ
सकते
हो
दूर
करोगे
तुम
भी
कह
कर
तुम
हालात
समझ
सकते
हो
- Anshika Shukla
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बढ़
के
इम्कान
से
नुक़्सान
उठाए
हुए
हैं
हम
मुहब्बत
में
बहुत
नाम
कमाए
हुए
हैं
मेरे
मौला
मुझे
ता'बीर
की
दौलत
दे
दे
मैंने
इक
शख़्स
को
कुछ
ख़्वाब
दिखाए
हुए
हैं
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Ejaz Tawakkal Khan
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न
सिर्फ़
ये
कि
जहन्नुम
ख़िताब
में
भी
नहीं
अली
के
मानने
वालों
के
ख़्वाब
में
भी
नहीं
Muzdum Khan
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ये
ज़रूरी
है
कि
आँखों
का
भरम
क़ाएम
रहे
नींद
रक्खो
या
न
रक्खो
ख़्वाब
मेयारी
रखो
Rahat Indori
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कि
तुमको
देखने
के
बाद
यारा
तुम्हारे
ख़्वाब
सब
देखा
करेंगे
Kaviraj " Madhukar"
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मेरे
हाथों
में
कुछ
गुलाब
तो
हैं
जो
न
मुमकिन
रहे
वो
ख़्वाब
तो
हैं
Shaista mufti
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मेरी
नींदें
उड़ा
रक्खी
है
तुम
ने
ये
कैसे
ख़्वाब
दिखलाती
हो
जानाँ
किसी
दिन
देखना
मर
जाऊँगा
मैं
मेरी
क़स
में
बहुत
खाती
हो
जानाँ
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Subhan Asad
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ऐसा
है
कि
सब
ख़्वाब
मुसलसल
नहीं
होते
जो
आज
तो
होते
हैं
मगर
कल
नहीं
होते
Ahmad Faraz
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मत
बताना
कि
बिखर
जाएँ
तो
क्या
होता
है
नईं
नस्लों
को
नए
ख़्वाब
सजाने
देना
Ameer Imam
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तसव्वुर
में
भी
अब
वो
बे-नक़ाब
आते
नहीं
मुझ
तक
क़यामत
आ
चुकी
है
लोग
कहते
हैं
शबाब
आया
Hafeez Jalandhari
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कुछ
नज़र
आता
नहीं
उस
के
तसव्वुर
के
सिवा
हसरत-ए-दीदार
ने
आँखों
को
अंधा
कर
दिया
Haidar Ali Aatish
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क्या
होता
है
ख़ामोशी
में
रहने
से
अपना
हाल
सुनाने
से
क्या
होता
है
Anshika Shukla
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हर
इक
शाम
अपनी
हदें
तोड़कर
के
ये
दोनों
किनारे
किधर
जा
रहे
हैं
Anshika Shukla
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आँसुओं
की
चाहत
से
ज़िंदगी
सजाई
है
ख़ाकसार
होकर
भी
ख़ाक
ही
उड़ाई
है
Anshika Shukla
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जो
अपने
घर
में
गुलदस्ता
सजाकर
रख
नहीं
सकते
गुलों
के
बाग
में
जाते
हैं
ख़ुशबू
देख
लेते
हैं
Anshika Shukla
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परिंदे
भी
मुड़कर
नहीं
आएँगे
क्या
दरख़्तों
के
दिन
अब
गुज़र
जा
रहे
हैं
Anshika Shukla
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