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Ansar Ethvi
bhanwar men jab kabhi bhi saamna majhdaar ka hona
bhanwar men jab kabhi bhi saamna majhdaar ka hona | भँवर में जब कभी भी सामना मझदार का होना
- Ansar Ethvi
भँवर
में
जब
कभी
भी
सामना
मझदार
का
होना
ज़रूरी
भी
है
कश्ती
के
लिए
पतवार
का
होना,
वतन
की
नीव
हैं
हम
तो
अलग
हो
ही
नहीं
सकते
कभी
देखा
है
ख़बरों
के
बिना
अख़बार
का
होना
- Ansar Ethvi
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कभी
तो
नस्ल-ओ-वतन-परस्ती
की
तीरगी
को
शिकस्त
होगी
कभी
तो
शाम-ए-अलम
मिटेगी
कभी
तो
सुब्ह-ए-ख़ुशी
मिलेगी
Abul mujahid zaid
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लो
चाँद
हो
गया
नमू
माह-ए-ख़राम
का
ऐ
मोमिनों
लिबास-ए-सियाह
ज़ेब-ए-तन
करो
फ़र्श-ए-अज़ा
बिछा
के
अज़ाख़ाने
में
शजर
अब
सुब्ह-ओ-शाम
ज़िक्र-ए-ग़रीब-उल-वतन
करो
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Shajar Abbas
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ये
सोचके
तो
दूसरी
कोई
मिट्टी
को
छु'आ
नहीं
के
बाद
मरने
के
हिन्दुस्तां
में
दफनाया
जाऊंगा
karan singh rajput
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है
नाज़
मुझको
अपनी
हिंदी
ज़बाँ
पे
यारो
हिंदी
हैं
हम
वतन
हैं
ये
देश
सब
सेे
आला
Dr Mohsin Khan
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वतन
की
ख़ाक
ज़रा
एड़ियाँ
रगड़ने
दे
मुझे
यक़ीन
है
पानी
यहीं
से
निकलेगा
Unknown
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ग़ुर्बत
की
ठंडी
छाँव
में
याद
आई
उस
की
धूप
क़द्र-ए-वतन
हुई
हमें
तर्क-ए-वतन
के
बाद
Kaifi Azmi
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सभी
का
ख़ून
है
शामिल
यहाँ
की
मिट्टी
में
किसी
के
बाप
का
हिन्दुस्तान
थोड़ी
है
Rahat Indori
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दिल
से
निकलेगी
न
मर
कर
भी
वतन
की
उल्फ़त
मेरी
मिट्टी
से
भी
ख़ुशबू-ए-वफ़ा
आएगी
Lal Chand Falak
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तिरंगा
दिल
में
है
लबों
पे
हिंदुस्तान
रखता
हूँ
सिपाही
हूँ
हथेली
पे
मैं
अपनी
जान
रखता
हूँ
Shashank Shekhar Pathak
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मज़हब
नहीं
सिखाता
आपस
में
बैर
रखना
हिन्दी
हैं
हम
वतन
है
हिन्दोस्ताँ
हमारा
Allama Iqbal
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हमारी
कोशिशें
हैं,
ये
ज़माना
अब
बदल
जाए
चराग़ों
के
दिमागों
से
हवा
का
डर
निकल
जाए
Ansar Ethvi
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वो
ठोकर
से
गिराना
चाहता
है
मुझे
पत्थर
पे
लाना
चाहता
है
जिसे
अपना
समझता
हूँ
जहाँ
में
वो
रस्ते
से
हटाना
चाहता
है
उसे
होते
नहीं
देखा
किसी
का
मगर
उसको
ज़माना
चाहता
है
वो
ख़ंजर
साथ
रखता
है
हमेशा
वो
ही
नश्तर
मिटाना
चाहता
है
ले
मैं
अब
आ
गया
तेरी
ही
महफ़िल
बता
तू
क्या
बताना
चाहता
है
वो
जिस
सेे
कर
रहा
वादा-ए-उलफ़त
उसे
बिस्तर
पे
लाना
चाहता
है
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Ansar Ethvi
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उसको
जब
ख़त
भेजेंगे
लिखकर
लानत
भेजेंगे
हाकिम
सचमुच
हिटलर
है
करके
हिम्मत
भेजेंगे
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Ansar Ethvi
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तेरी
कश्ती
रवानी
में
वो
आनी
भी
नहीं
देंगे
तुझे
पहचान
अपनी
ही
बनानी
भी
नहीं
देंगे
वफ़ादारी
लुटाई
तूने
कुछ
ऐसे
ही
लोगों
पर
जो
तुझको
ही
तिरे
हिस्से
का
पानी
भी
नहीं
देंगे
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Ansar Ethvi
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परिंदों
खुल
के
उड़ना
है
परिंदों
खुल
के
जीना
है
परिंदों
अब
किसी
सय्याद
के
झाँसे
में
मत
आना
Ansar Ethvi
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