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Ansar Ethvi
yahii to zid hamaari hai yahaañ kuchh kar nikaalenge
yahii to zid hamaari hai yahaañ kuchh kar nikaalenge | यही तो ज़िद हमारी है यहाँ कुछ कर निकालेंगे
- Ansar Ethvi
यही
तो
ज़िद
हमारी
है
यहाँ
कुछ
कर
निकालेंगे
चराग़ों
के
दिमागों
से
हवा
का
डर
निकालेंगे
ज़माने
में
ख़ज़ाने
खोलकर
रखता
नहीं
कोई
परिंदे
जब
उड़ेंगे
तब
ही
अपने
पर
निकालेंगे
अली
से
हो
जिन्हें
चाहत
वही
क़ुर्बान
होते
हैं
यज़ीदी
सोच
हो
जिनकी
वही
ख़ंजर
निकालेंगे
- Ansar Ethvi
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उसकी
चाहत
में
भी
इख़लास
नहीं
था
शायद
और
कुछ
हम
भी
उसे
दिल
से
नहीं
चाह
सके
Salman ashhadi sahil
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दिल
को
तेरी
चाहत
पे
भरोसा
भी
बहुत
है
और
तुझ
से
बिछड़
जाने
का
डर
भी
नहीं
जाता
Ahmad Faraz
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इतना
ऊँचा
उड़ना
भी
कुछ
ठीक
नहीं
पाबंदी
लग
जाती
है
परवाज़ों
पर
तुझको
छू
कर
और
किसी
की
चाह
रखे
हैरत
है
और
लानत
है
ऐसे
हाथों
पर
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Varun Anand
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उड़
गए
सारे
परिंदे
मौसमों
की
चाह
में
इंतिज़ार
उन
का
मगर
बूढे
शजर
करते
रहे
Ambreen Haseeb Ambar
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ज़रा
पाने
की
चाहत
में
बहुत
कुछ
छूट
जाता
है
नदी
का
साथ
देता
हूँ
समुंदर
रूठ
जाता
है
Aalok Shrivastav
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मुझे
चाह
थी
किसी
और
की,
प
मुझे
मिला
कोई
और
है
मेरी
ज़िन्दगी
का
है
और
सच,
मेरे
ख़्वाब
सा
कोई
और
है
तू
क़रीब
था
मेरे
जिस्म
के,
बड़ा
दूर
था
मेरी
रूह
से
तू
मेरे
लिए
मेरे
हमनशीं
कोई
और
था
कोई
और
है
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Avtar Singh Jasser
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मैं
आज
जो
भी
कहूँगा
तुम
सेे
वो
सच
है
जानम
ये
जान
लो
तुम
मिरी
ग़ज़ल
के
हरेक
मिसरे
से
मेरी
चाहत
झलक
रही
है
Amaan Pathan
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चाह
थी
दो
जहाँ
की
मगर
देखिए
इक
गली
से
गुज़रता
रहा
उम्र
भर
Ashraf Jahangeer
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उसको
चाहा
और
चाहत
पर
क़ायम
हैं
पर
अफ़सोस
के
हम
इज़हार
नहीं
कर
सकते
Shadab Asghar
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भटकती
रूहों
का
बोझ
कब
तक
कोई
उठाता
कहीं
ठहरता,पनाह
लेता,
तो
साथ
होता
मैं
जिस
'अक़ीदत
के
साथ
उसको
भुला
रहा
हूँ
उसी
'अक़ीदत
से
चाह
लेता,
तो
साथ
होता
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Armaan khan
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जिस
को
वीरानी
ने
रक्खा
हुआ
असीरी
में
उस
को
गुलशन
में
भी
सहरा
दिखाई
देता
है
Ansar Ethvi
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उसको
जब
ख़त
भेजेंगे
लिखकर
लानत
भेजेंगे
हाकिम
सचमुच
हिटलर
है
करके
हिम्मत
भेजेंगे
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Ansar Ethvi
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मोहब्बत
का
वो
दावा
कर
रहा
होगा
वो
सब
सेे
अब
दिखावा
कर
रहा
होगा
चराग़ों
पर
अभी
है
गर्दिश-ए-दौराँ
वो
आँधी
को
इशारा
कर
रहा
होगा
वो
रातों
को
बड़ी
मुश्किल
से
सोता
है
निवालों
की
ही
पर्वा
कर
रहा
होगा
खिलौने
ग़ौर
से
बच्चे
ने
देखे
थे
वो
पाने
का
तक़ाज़ा
कर
रहा
होगा
वो
साहिल
पे
सलामत
इसलिए
आया
मदद
पानी
का
क़तरा
कर
रहा
होगा
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Ansar Ethvi
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मुझे
बेज़ार
करने
के
उसे
भी
ख़्वाब
रहते
हैं
कि
जैसे
सामने
कश्ती
के
कुछ
गिर्दाब
रहते
हैं
जिसे
देखा
गया
हो
बस
गरजने
की
ही
सूरत
में
उसी
एक
अब्र
में
लिपटे
हुए
सैलाब
रहते
हैं
उन्हीं
के
सामने
आती
है
अक्सर
मुश्किलें
सारी
वो
ही
कुछ
शख़्स
जो
सबके
लिए
बेताब
रहते
हैं
हमारे
साथ
रहकर
भी
हमारे
हो
नहीं
सकते
हमारी
बज़्म
में
ऐसे
कई
अहबाब
रहते
हैं
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Ansar Ethvi
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बिछड़ता
है
कहीं
कोई
बहुत
ही
रंज
होता
है
परिंदों
को
हमेशा
मैं
क़फ़स
से
दूर
रखता
हूँ
Ansar Ethvi
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