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Ansar Ethvi
bichhadta hai kahii koi bahut hi ranj hota hai
bichhadta hai kahii koi bahut hi ranj hota hai | बिछड़ता है कहीं कोई बहुत ही रंज होता है
- Ansar Ethvi
बिछड़ता
है
कहीं
कोई
बहुत
ही
रंज
होता
है
परिंदों
को
हमेशा
मैं
क़फ़स
से
दूर
रखता
हूँ
- Ansar Ethvi
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कच्चा
सा
घर
और
उस
पर
जोरों
की
बरसात
है
ये
तो
कोई
खानदानी
दुश्मनी
की
बात
है
Saahir
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रंज
से
ख़ूगर
हुआ
इंसाँ
तो
मिट
जाता
है
रंज
मुश्किलें
मुझ
पर
पड़ीं
इतनी
कि
आसाँ
हो
गईं
Mirza Ghalib
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मुझे
दुश्मन
से
भी
ख़ुद्दारी
की
उम्मीद
रहती
है
किसी
का
भी
हो
सर
क़दमों
में
सर
अच्छा
नहीं
लगता
Javed Akhtar
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कुछ
बात
है
कि
हस्ती
मिटती
नहीं
हमारी
सदियों
रहा
है
दुश्मन
दौर-ए-ज़माँ
हमारा
Allama Iqbal
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तेरी
तारीफ़
करने
लग
गए
हैं
तेरे
दुश्मन
हमारे
शे'र
सुनके
Tanoj Dadhich
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जुदा
किसी
से
किसी
का
ग़रज़
हबीब
न
हो
ये
दाग़
वो
है
कि
दुश्मन
को
भी
नसीब
न
हो
Nazeer Akbarabadi
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ऐसे
तेवर
दुश्मन
ही
के
होते
हैं
पता
करो
ये
लड़की
किस
की
बेटी
है
Zia Mazkoor
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ये
ग़म
नहीं
है
कि
हम
दोनों
एक
हो
न
सके
ये
रंज
है
कि
कोई
दरमियान
में
भी
न
था
Jamal Ehsani
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अब
दोस्त
कोई
लाओ
मुक़ाबिल
में
हमारे
दुश्मन
तो
कोई
क़द
के
बराबर
नहीं
निकला
Munawwar Rana
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ये
ज़िंदगी
भी
अजब
कारोबार
है
कि
मुझे
ख़ुशी
है
पाने
की
कोई
न
रंज
खोने
का
Javed Akhtar
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जो
भी
कहना
है
तो
मैदान
में
आना
होगा
ज़िंदा
रहना
है
तो
मैदान
में
आना
होगा
पीछे
चलने
से
तो
पहचान
सिमट
जाती
है
आगे
रहना
है
तो
मैदान
में
आना
होगा
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Ansar Ethvi
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लहरों
ने
टूटी
कश्ती
को
कमतर
समझ
लिया
अच्छा
हुआ
कि
कश्ती
ने
तेवर
समझ
लिया
जिस
दाम
जिसने
चाहा
उसी
दाम
में
रखा
मुझको
किसी
गरीब
का
ज़ेवर
समझ
लिया
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Ansar Ethvi
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कच्ची
मिट्टी
जैसा
मैं
भी
कच्चा
लगता
हूँ
माँ
की
गोद
में
सर
रखते
ही
बच्चा
लगता
हूँ
Ansar Ethvi
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सिर्फ़
वादे
ही
निभाने
में
गुज़र
जाती
है
ज़िन्दगी
खाने
कमाने
में
गुज़र
जाती
है
घर
तो
उनका
भी
गिरा
देती
हैं
ये
सरकारें
उम्र
ही
जिनकी
बनाने
में
गुज़र
जाती
है
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Ansar Ethvi
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मैं
जैसा
चाहूँ
ये
क़िस्मत
कभी
वैसा
नहीं
रखती
बहुत
खिलवाड़
करती
है
कभी
अच्छा
नहीं
रखती
फटा
सा
नोट
हूँ
हर
बार
तो
मैं
चल
नहीं
सकता
दवा
अपना
असर
हर
बार
के
जैसा
नहीं
रखती
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Ansar Ethvi
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