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Ansar Ethvi
mohabbat ka vo daava kar raha hogaa
mohabbat ka vo daava kar raha hogaa | मोहब्बत का वो दावा कर रहा होगा
- Ansar Ethvi
मोहब्बत
का
वो
दावा
कर
रहा
होगा
वो
सब
सेे
अब
दिखावा
कर
रहा
होगा
चराग़ों
पर
अभी
है
गर्दिश-ए-दौराँ
वो
आँधी
को
इशारा
कर
रहा
होगा
वो
रातों
को
बड़ी
मुश्किल
से
सोता
है
निवालों
की
ही
पर्वा
कर
रहा
होगा
खिलौने
ग़ौर
से
बच्चे
ने
देखे
थे
वो
पाने
का
तक़ाज़ा
कर
रहा
होगा
वो
साहिल
पे
सलामत
इसलिए
आया
मदद
पानी
का
क़तरा
कर
रहा
होगा
- Ansar Ethvi
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सबको
बस
पानी
पीने
से
मतलब
है
बस
माँ
को
चिंता
है
मटका
भरने
की
Tanoj Dadhich
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सेहरा
है
या
पानी
है
आँखों
में
हैरानी
है
हम
पर
शक़
है
लोगों
को
दिल
की
कारिस्तानी
है
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Madhyam Saxena
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पेड़
के
काटने
वालों
को
ये
मालूम
तो
था
जिस्म
जल
जाएँगे
जब
सर
पे
न
साया
होगा
Kaifi Azmi
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क्या
कहा
दोस्त
समझना
है
तुम्हें
प्यार
नहीं
यानी
बस
देखना
है
पानी
को
पीना
नहीं
है
Neeraj Neer
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चूमने
की
रस्म
बाक़ी
है
अभी
भी
डर
है
पहले
देह
को
उबटन
न
चू
में
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Neeraj Neer
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उस
से
कहना
की
धुआँ
देखने
लाएक़
होगा
आग
पहने
हुए
मैं
जाऊँगा
पानी
की
तरफ़
Abhishek shukla
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आँख
में
पानी
रखो,
होंटों
पे
चिंगारी
रखो
ज़िंदा
रहना
है
तो
तरकीबें
बहुत
सारी
रखो
Rahat Indori
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तेरी
गली
को
छोड़
के
पागल
नहीं
गया
रस्सी
तो
जल
गई
है
मगर
बल
नहीं
गया
मजनूँ
की
तरह
छोड़ा
नहीं
मैं
ने
शहर
को
या'नी
मैं
हिज्र
काटने
जंगल
नहीं
गया
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Ismail Raaz
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पुरानी
कश्ती
को
पार
लेकर
फ़क़त
हमारा
हुनर
गया
है
नए
खेवइये
कहीं
न
समझें
नदी
का
पानी
उतर
गया
है
Uday Pratap Singh
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जो
यहाँ
ख़ुद
ही
लगा
रक्खी
है
चारों
जानिब
एक
दिन
हम
ने
इसी
आग
में
जल
जाना
है
Zafar Iqbal
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हवा
के
हम-नशीं
हाथों
में
अपने
हाथ
मलते
हैं
चराग़ों
की
अगर
ज़िद
हो
हवाओं
में
ही
जलते
हैं
बहादुर
तो
नहीं
डरते
किसी
ऐसे
मुख़ालिफ़
से
बहुत
से
फूल
ऐसे
हैं
जो
काँटों
में
ही
पलते
हैं
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Ansar Ethvi
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जिसे
देखूँ
वही
बेहतर
रिवाजों
का
नहीं
लगता
यहाँ
हर
शख़्स
मेरे
तो
मिज़ाजों
का
नहीं
लगता
दवा
मैं
माँगता
कुछ
हूँ
मुझे
कुछ
और
देता
है
वो
चारा-गर
मुझे
बिल्कुल
इलाजों
का
नहीं
लगता
हुकूमत
करने
वाला
ही
जहाँ
भगवान
बन
जाए
समझ
लो
फिर
वहाँ
कोई
समाजों
का
नहीं
लगता
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Ansar Ethvi
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मैं
जैसा
चाहूँ
ये
क़िस्मत
कभी
वैसा
नहीं
रखती
बहुत
खिलवाड़
करती
है
कभी
अच्छा
नहीं
रखती
फटा
सा
नोट
हूँ
हर
बार
तो
मैं
चल
नहीं
सकता
दवा
अपना
असर
हर
बार
के
जैसा
नहीं
रखती
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Ansar Ethvi
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मुझको
किसी
की
ऐसी
फ़ितरत
नहीं
पसंद
चीज़ों
की
जिनको
सच
में
क़ीमत
नहीं
पसंद
मुझको
मुख़ालिफ़ों
की
रंजिश
तो
है
क़ुबूल
लेकिन
मुनाफ़िक़ों
की
क़ुर्बत
नहीं
पसंद
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Ansar Ethvi
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हर
कोई
कब
पाने
की
चाहत
करता
है
पाने
वाला
ही
अक्सर
शिद्दत
करता
है
तुम
उस
सेे
आज़ादी
की
बातें
करते
हो
जो
ज़ंजीरों
की
काफ़ी
इज़्ज़त
करता
है
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