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Anmol Mishra
lagao aag aao bhaaisahab
lagao aag aao bhaaisahab | लगाओ आग आओ भाईसाहब
- Anmol Mishra
लगाओ
आग
आओ
भाईसाहब
लगाकर
फिर
बुझाओ
भाईसाहब
अगर
अब
पाप
से
मन
भर
गया
हो
उठो
गंगा
नहाओ
भाईसाहब
ये
नाटक
ब्लॉक
और
अनब्लॉक
का
बस
चलो
नंबर
मिटाओ
भाईसाहब
अगर
कई
लाख
का
रुतबा
तुम्हारा
ज़रा
ज़ीरो
हटाओ
भाईसाहब
यहीं
बैठा
हूँ
मेरे
क़ातिलों
को
बुलाकर
आज
लाओ
भाईसाहब
बहुत
बोए
ज़मीं
में
रोज़
सरसों
हथेली
पर
उगाओ
भाईसाहब
- Anmol Mishra
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उसे
बेचैन
कर
जाऊँगा
मैं
भी
ख़मोशी
से
गुज़र
जाऊँगा
मैं
भी
Ameer Qazalbash
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ग़लत
बातों
को
ख़ामोशी
से
सुनना
हामी
भर
लेना
बहुत
हैं
फ़ाएदे
इस
में
मगर
अच्छा
नहीं
लगता
Javed Akhtar
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मेरे
होंटों
पे
ख़ामुशी
है
बहुत
इन
गुलाबों
पे
तितलियाँ
रख
दे
Shakeel Azmi
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शब-ए-हिज्रां
बुझा
बैठी
हूँ
मैं
सारे
सितारे
पर
कोई
फ़ानूस
रौशन
है
ख़मोशी
से
मेरे
अंदर
Kiran K
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हम
त'अल्लुक़
जिसे
समझते
थे
वो
त'अल्लुक़
नहीं
तकल्लुफ़
था
Akash Rajpoot
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फिर
ख़मोशी
ने
साज़
छेड़ा
है
फिर
ख़यालात
ने
ली
अँगड़ाई
Javed Akhtar
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ख़ामुशी
से
हुई
फ़ुग़ाँ
से
हुई
इब्तिदा
रंज
की
कहाँ
से
हुई
Ada Jafarey
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बहुत
कुछ
बोलना
है
पर
अभी
ख़ामोश
रहने
दो
ख़मोशी
बोलती
है
तो,
बड़ी
आवाज़
करती
है
Divy Kamaldhwaj
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ख़मोशी
तो
यही
बतला
रही
है
उदासी
रास
मुझको
आ
रही
है
मुझे
जिन
ग़लतियों
से
सीखना
था
वही
फिर
ज़िंदगी
दोहरा
रही
है
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Vishal Singh Tabish
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एक
दिन
मेरी
ख़ामुशी
ने
मुझे
लफ़्ज़
की
ओट
से
इशारा
किया
Anjum Saleemi
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ये
दोस्त
दुनिया
ये
जालसाज़ी
क़दम
क़दम
पर
करे
है
ठोकर
तेरा
सुदामा
गिरा
कन्हैया
इसे
उठाओ
गले
लगाओ
Anmol Mishra
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तेज़
न
बोलो
रो
जाएगा
एक
तमाशा
हो
जाएगा
मेरी
नींद
उड़ाने
वाला
ऐसे
कैसे
सो
जाएगा
ज्यूँ
ही
चमके
आँख
में
सपना
बांँधो
वरना
खो
जाएगा
सब
सेे
यूँंँ
हंँस
हँसकर
मिलना
तेरी
इज़्ज़त
धो
जाएगा
वो
और
हम,
तुम
जाना
किसको
रुको
न
तुम
भी
वो
जाएगा
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Anmol Mishra
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ख़ामोशियाँ
ग़ुलाम
बनाती
हैं
शोर
को
शब
इश्क़
के
उसूल
सिखाती
चकोर
को
दिन
भर
तो
मेरे
यार
मेरे
यार
थे
बहुत
पर
शाम
को
गया
जो
वो
लौटा
न
भोर
को
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Anmol Mishra
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जंगल
जंगल
भटका
पानी
एक
नदी
में
अटका
पानी
कोई
दरिया
खोज
रहा
था
बीच
गगन
में
लटका
पानी
पैर
तुम्हारे
चूम
रहा
क्यूँ
जाने
कौन
से
तट
का
पानी
उसने
पूछा
क्या
है
मुहब्बत
देख
उसे
फिर
गटका
पानी
इतनी
सुन्दर
क्या
होगा
जब
तुम
पर
पड़ेगा
घट
का
पानी
कितने
सागर
तैर
गया
पर
उन
आँखों
का
खटका
पानी
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Anmol Mishra
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तमाम
रातें
सुकून
सारा
चुरा
के
जानाँ
कहाँँ
को
चल
दी
सुनो
शब-ए-वस्ल
है
हमारी
जगा
के
जानाँ
कहाँँ
को
चल
दी
हमारे
पैरों
पे
पैर
रख
के
खड़ी
हुई
थी
गले
लगाने
तुम्हारे
पैरों
लगी
महावर
लगा
के
जानाँ
कहाँँ
को
चल
दी
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Anmol Mishra
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