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Anmol Mishra
ye dost duniya ye jaalsazi qadam qadam par kare hai thokar
ye dost duniya ye jaalsazi qadam qadam par kare hai thokar | ये दोस्त दुनिया ये जालसाज़ी क़दम क़दम पर करे है ठोकर
- Anmol Mishra
ये
दोस्त
दुनिया
ये
जालसाज़ी
क़दम
क़दम
पर
करे
है
ठोकर
तेरा
सुदामा
गिरा
कन्हैया
इसे
उठाओ
गले
लगाओ
- Anmol Mishra
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पेड़
को
काटने
वाले
क्या
जाने
दुख
हम
गले
लग
नहीं
सकते
दीवार
से
Neeraj Neer
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इसी
ख़्वाब
में
ज़ाया'
किया
'ईद
को
हर
दम
कभी
बोले
वो
सीने
से
लगकर
मुबारक
हो
Harsh saxena
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ख़ूब-सूरत
ये
मोहब्बत
में
सज़ा
दी
उसने
फिर
गले
मिलके
मेरी
उम्र
बढ़ा
दी
उसने
Manzar Bhopali
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गले
से
वो
लगा
ले
जिसको
भी
अपने
उसे
फिर
इत्र
की
दरकार
ही
क्या
है
Harsh saxena
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आज
के
दिन
कभी
सीने
से
लगाते
थे
तुम्हें
और
अब
तुमको
बधाई
भी
नहीं
दे
सकते
Astitwa Ankur
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कहीं
किसी
भी
बहाने
मुझे
बुला
इक
रोज़
ऐ
चाँद
तुझ
को
क़सम
है
ज़मीं
पे
आ
इक
रोज़
मुझे
क़बूल
है
गर
खाक़
भी
हो
जाऊँ
मैं
क़रीब
आ
के
मुझे
सीने
से
लगा
इक
रोज़
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Chandan Sharma
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उसने
गले
से
हमको
लगाया
तो
रो
पड़े
अपना
बना
के
हाथ
छुड़ाया
तो
रो
पड़े
मैंने
ग़मों
से
कह
तो
दिया
रहना
उम्र
भर
वा'दा
ग़मों
ने
अपना
निभाया
तो
रो
पड़े
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Vikas Sahaj
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शक
है
तुझे
अगर
ये
अब
भी
गुदाज़
है
दिल
तो
सीने
से
कभी
ये
पत्थर
निकाल
मेरा
Abhay Aadiv
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गले
सब
मिल
रहे
हैं
उस
सेे
हँसकर
हमारा
हक़
तो
मारा
जा
रहा
है
Pooja Bhatia
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मोहब्बतों
में
दिखावे
की
दोस्ती
न
मिला
अगर
गले
नहीं
मिलता
तो
हाथ
भी
न
मिला
Bashir Badr
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ख़ामोशियाँ
ग़ुलाम
बनाती
हैं
शोर
को
शब
इश्क़
के
उसूल
सिखाती
चकोर
को
दिन
भर
तो
मेरे
यार
मेरे
यार
थे
बहुत
पर
शाम
को
गया
जो
वो
लौटा
न
भोर
को
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Anmol Mishra
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लगाओ
आग
आओ
भाईसाहब
लगाकर
फिर
बुझाओ
भाईसाहब
अगर
अब
पाप
से
मन
भर
गया
हो
उठो
गंगा
नहाओ
भाईसाहब
ये
नाटक
ब्लॉक
और
अनब्लॉक
का
बस
चलो
नंबर
मिटाओ
भाईसाहब
अगर
कई
लाख
का
रुतबा
तुम्हारा
ज़रा
ज़ीरो
हटाओ
भाईसाहब
यहीं
बैठा
हूँ
मेरे
क़ातिलों
को
बुलाकर
आज
लाओ
भाईसाहब
बहुत
बोए
ज़मीं
में
रोज़
सरसों
हथेली
पर
उगाओ
भाईसाहब
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Anmol Mishra
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फटे
मुक़द्दर
पे
रख
के
खद्दर
हुई
सिकंदर
उदास
नस्लें
ज़मीन
फाड़ी
निचोड़े
बादल
बनाए
सागर
उदास
नस्लें
सुलगते
ख़्वाबों
की
राख
लेकर
गढ़े
थे
पुतले
जो
टेढ़े
मेढ़े
हँसी
के
मंतर
से
जान
फूँके
उन्हीं
के
अंदर
उदास
नस्लें
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Anmol Mishra
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ख़ुद
ही
मारो
ख़ुद
ही
ख़ुद
में
मर
जाओ
ख़ुद
की
लाशें
ख़ुद
कंधों
पर
ढोते
नइंँ
Anmol Mishra
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महकते
पन्नों
की
भीनी
ख़ुशबू
नशा
चढ़ाए
अलग
तरह
का
जहाँँ
में
जितने
शराबख़ाने
बनाओ
सारे
किताबख़ाने
Anmol Mishra
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