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Anjum Lucknowi
munh se jhadte hain chaahaton ke phool
munh se jhadte hain chaahaton ke phool | मुँह से झड़ते हैं चाहतों के फूल
- Anjum Lucknowi
मुँह
से
झड़ते
हैं
चाहतों
के
फूल
जब
मगन
होके
गुनगुनाती
है
- Anjum Lucknowi
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होली
है
या
फिर
फूलों
का
मौसम
है
सब
के
चेहरों
पे
रंग
है
ख़ुशबू
भी
है
Meem Alif Shaz
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मेरे
नादाँ
दिल
उदासी
कोई
अच्छी
शय
नहीं
देख
सूखे
फूल
पर
आती
नहीं
हैं
तितलियाँ
Deepak Vikal
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मैंने
चाहा
भी
कि
फिर
इस
संग-दिल
पे
फूल
उगे
पर
तुम्हारी
रुख़्सती
के
बाद
ये
होता
नहीं
Siddharth Saaz
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तुम
सेे
जो
मिला
हूँ
तो
मेरा
हाल
है
बदला
पतझड़
में
भी
जैसे
के
कोई
फूल
खिला
हो
Haider Khan
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फूल
से
लेकर
ये
धनिया
लाने
तक
के
इस
सफ़र
को
मुझको
तेरे
साथ
ही
तय
करने
की
ख़्वाहिश
है
पगली
Harsh saxena
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बिखर
के
फूल
फ़ज़ाओं
में
बास
छोड़
गया
तमाम
रंग
यहीं
आस-पास
छोड़
गया
Aanis Moin
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मैंने
बस
इतना
पूछा
था
क्या
देखते
हो
भला
मैंने
ये
कब
कहा
था
मुझे
देखना
छोड़
दो
गीली
मिट्टी
की
ख़ुशबू
मुझे
सोने
देती
नहीं
मेरे
बालों
में
तुम
उँगलियाँ
फेरना
छोड़
दो
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Tajdeed Qaiser
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अपने
होंटों
से
कहो
फूल
को
चू
में
हर
रोज़
जब
मेरे
लब
नहीं
होंगे
तो
सहूलत
होगी
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Shahbaz Rizvi
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फूल
की
आँख
में
शबनम
क्यूँँ
है
सब
हमारी
ही
ख़ता
हो
जैसे
Bashir Badr
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वैसे
तो
ज़ेवरों
की
ज़रूरत
नहीं
तुझे
फिर
भी
अगर
ये
फूल
तेरे
काम
आ
सके
Charagh Sharma
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जब
से
रूठे
नज़र
नहीं
आए
मुद्दतों
मेरे
घर
नहीं
आए
जो
सितारे
मेरे
नसीब
के
थे
अर्श
से
फ़र्श
पर
नहीं
आए
फैलते
देखी
सुर्खिये
इशराक
ढल
गए
दोपहर
नहीं
आए
वो
जो
आएँ
तो
नींद
आएगी
वो
अभी
तक
मगर
नहीं
आए
इतने
नाराज़
वो
हुए
'अंजुम'
फिर
कभी
लौट
कर
नहीं
आए
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Anjum Lucknowi
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मुझको
झूले
में
जब
झुलाती
है
माँ
मुझे
लोरियाँ
सुनाती
है
Anjum Lucknowi
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इक
भरा
घर
सँभालती
है
माँ
अपने
बच्चों
को
पालती
है
माँ
दुख
उठाकर
दुआएं
दे
देके
हर
मुसीबत
को
टालती
है
माँ
आग
पे
रख
के
सब्र
की
हांडी
रोज़
कंकर
उबालती
है
माँ
गुनगुनाती
है
लोरियाँ
अक्सर
गोद
में
जब
उछालती
है
माँ
करके
ताकीद
झूठ
मत
बोलो
सच
के
साँचे
में
ढालती
है
माँ
बच्चे
बाहर
निकाल
देते
हैं
किसको
घर
से
निकालती
है
माँ
फ़िक़्र-ए-अंजुम
जहाँ
है
गोता
जन
वो
सेमुंदर
खंगालती
है
माँ
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Anjum Lucknowi
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