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Anjum Lucknowi
jab se roothe nazar nahin aaye
jab se roothe nazar nahin aaye | जब से रूठे नज़र नहीं आए
- Anjum Lucknowi
जब
से
रूठे
नज़र
नहीं
आए
मुद्दतों
मेरे
घर
नहीं
आए
जो
सितारे
मेरे
नसीब
के
थे
अर्श
से
फ़र्श
पर
नहीं
आए
फैलते
देखी
सुर्खिये
इशराक
ढल
गए
दोपहर
नहीं
आए
वो
जो
आएँ
तो
नींद
आएगी
वो
अभी
तक
मगर
नहीं
आए
इतने
नाराज़
वो
हुए
'अंजुम'
फिर
कभी
लौट
कर
नहीं
आए
- Anjum Lucknowi
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मिलना
था
इत्तिफ़ाक़
बिछड़ना
नसीब
था
वो
उतनी
दूर
हो
गया
जितना
क़रीब
था
Anjum Rehbar
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उन
के
होने
से
बख़्त
होते
हैं
बाप
घर
के
दरख़्त
होते
हैं
Unknown
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पलटा
दे
तक़दीर
हमारी
आकर
माथा
चूम
हमारा
Siddharth Saaz
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जुदा
किसी
से
किसी
का
ग़रज़
हबीब
न
हो
ये
दाग़
वो
है
कि
दुश्मन
को
भी
नसीब
न
हो
Nazeer Akbarabadi
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कोई
भी
रोक
न
पाता,
गुज़र
गया
होता
मेरा
नसीब-ए-मोहब्बत
सँवर
गया
होता
न
आईं
होती
जो
बेग़म
मेरी
अयादत
को
मैं
अस्पताल
की
नर्सों
पर
मर
गया
होता
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Paplu Lucknawi
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हुस्न
को
भी
कहाँ
नसीब
'जिगर'
वो
जो
इक
शय
मिरी
निगाह
में
है
Jigar Moradabadi
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कभी
पत्थर
मुक़द्दर
लिख
नहीं
सकता
मगर
समझो
जिसे
पत्थर
में
ढूँढो
हो
तुम्हारे
पास
ही
तो
है
Tanha
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बी.ए
भी
पास
हों
मिले
बी-बी
भी
दिल-पसंद
मेहनत
की
है
वो
बात
ये
क़िस्मत
की
बात
है
Akbar Allahabadi
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नया
लिबास
भी
पहनो
तो
इस
तरह
पहनो
जिन्हें
नसीब
नहीं
है
उन्हें
नया
न
लगे
Javed Saba
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किसी
को
साल-ए-नौ
की
क्या
मुबारकबाद
दी
जाए
कैलन्डर
के
बदलने
से
मुक़द्दर
कब
बदलता
है
Aitbar Sajid
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इक
भरा
घर
सँभालती
है
माँ
अपने
बच्चों
को
पालती
है
माँ
दुख
उठाकर
दुआएं
दे
देके
हर
मुसीबत
को
टालती
है
माँ
आग
पे
रख
के
सब्र
की
हांडी
रोज़
कंकर
उबालती
है
माँ
गुनगुनाती
है
लोरियाँ
अक्सर
गोद
में
जब
उछालती
है
माँ
करके
ताकीद
झूठ
मत
बोलो
सच
के
साँचे
में
ढालती
है
माँ
बच्चे
बाहर
निकाल
देते
हैं
किसको
घर
से
निकालती
है
माँ
फ़िक़्र-ए-अंजुम
जहाँ
है
गोता
जन
वो
सेमुंदर
खंगालती
है
माँ
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Anjum Lucknowi
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मुझको
झूले
में
जब
झुलाती
है
माँ
मुझे
लोरियाँ
सुनाती
है
Anjum Lucknowi
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मुँह
से
झड़ते
हैं
चाहतों
के
फूल
जब
मगन
होके
गुनगुनाती
है
Anjum Lucknowi
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