is shahar ke log ajeeb se hain ab sab hi tumhaare aseer hue | इस शहर के लोग अजीब से हैं अब सब ही तुम्हारे असीर हुए

  - Anees Ansari
इसशहरकेलोगअजीबसेहैंअबसबहीतुम्हारेअसीरहुए
जबजाँपेबरसतेथेपत्थरउसवक़्तहमींदिल-गीरहुए
कुछलोगतुम्हारीआँखोंसेकरतेहैंतलबहीरेमोती
हमसहरासहराडूबगएइकआनमेंजोगीफ़क़ीरहुए
तुमदर्दकीलज़्ज़तक्याजानोकबतुमनेचखेहैंज़हर-ए-सुबू
हमअपनेवजूदकेशाहिदहैंसंगसारहुएशमशीरहुए
येपहरोंपहरोंसोच-नगररातोंरातोंबे-ख़्वाबलहर
फिरकैसेकटेगाधूप-सफ़रजबपीरलुटीजागीरहुए
इकउम्रगुज़ारीहैयूँँहीसायोंकेतआ'क़ुबमेंहमने
टुकबैठगएफिरचलनिकलेहँसबोललिएदिल-गीरहुए
कुछशहरतुम्हारातंगभीथाकुछतुमभीथेकमज़ोरज़रा
पत्थरकीनिगाहोंकेडरसेतुमअपनेहीघरमेंअसीरहुए
  - Anees Ansari
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