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Ananya Rai Parashar
ilm itnaa to mujhe haasil hai
ilm itnaa to mujhe haasil hai | इल्म इतना तो मुझे हासिल है
- Ananya Rai Parashar
इल्म
इतना
तो
मुझे
हासिल
है
बे-सबब
कोई
बहस
अच्छी
नहीं
- Ananya Rai Parashar
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मेरे
अश'आर
पढ़ने
वाले
लोग
तेरी
तस्वीर
माँग
बैठे
हैं
Shadab Javed
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किताब-ए-इश्क़
में
हर
आह
एक
आयत
है
पर
आँसुओं
को
हुरूफ़-ए-मुक़त्तिआ'त
समझ
Umair Najmi
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बच्चों
के
छोटे
हाथों
को
चाँद
सितारे
छूने
दो
चार
किताबें
पढ़
कर
ये
भी
हम
जैसे
हो
जाएँगे
Nida Fazli
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एक
आवाज़
पे
आ
जाती
है
दौड़ी
दौड़ी
दश्त-ओ-सहरा-ओ-बयाबान
नहीं
देखती
है
दोस्ती
दोस्ती
होती
है
तुम्हें
इल्म
नहीं
दोस्ती
फ़ाइदा
नुक़सान
नहीं
देखती
है
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Aadil Rasheed
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फ़ातिहा
पढ़
कि
फूल
रख
मुझ
पर
आ
गया
है
तो
कुछ
जता
अफ़सोस
Siraj Faisal Khan
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नाम
लिख
लिख
के
तिरा
फूल
बनाने
वाला
आज
फिर
शबनमीं
आँखों
से
वरक़
धोता
है
Ghulam Mohammad Qasir
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तमाम
होश
ज़ब्त
इल्म
मस्लहत
के
बाद
भी
फिर
इक
ख़ता
मैं
कर
गया
था
माज़रत
के
बाद
भी
Pallav Mishra
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तुझे
कैसे
इल्म
न
हो
सका
बड़ी
दूर
तक
ये
ख़बर
गई
तिरे
शहर
ही
की
ये
शाएरा
तिरे
इंतिज़ार
में
मर
गई
Mumtaz Naseem
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चुपके
चुपके
वो
पढ़
रहा
है
मुझे
धीरे
धीरे
बदल
रहा
हूँ
मैं
Aziz Nabeel
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आदमिय्यत
और
शय
है
इल्म
है
कुछ
और
शय
कितना
तोते
को
पढ़ाया
पर
वो
हैवाँ
ही
रहा
Sheikh Ibrahim Zauq
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मुश्किलों
की
शिफ़ा
हो
जाएँगे
हम
मरज़
की
दवा
हो
जाएँगे
उसके
चेहरे
की
बात
क्या
लिक्खें
लिखते-लिखते
फ़ना
हो
जाएँगे
हमने
सोचा
न
था
मोहब्बत
में
क्या
से
हम
जाने
क्या
हो
जाएँगे
ज़िंदगी
को
निभाएँगे
इतना
ज़िंदगी
की
दु'आ
हो
जाएँगे
गर
मैं
कोई
चराग़
बन
जाऊँ
दुनिया
वाले
हवा
हो
जाएँगे
इक
ना
इक
रोज़
तोड़कर
ज़िंदान
सब
परिंदे
रिहा
हो
जाएँगे
साफ़
सादा
वजूद
है
अपना
हम
भी
इक
आइना
हो
जाएँगे
इब्तिदा
इश्क़
में
है
ऐसी
मेरी
एक
दिन
इंतिहा
हो
जाएँगे
ऐसे
देखो
न
तुम
'अनन्या'
को
वरना
हम
अपसरा
हो
जाएँगे
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Ananya Rai Parashar
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किसी
की
कट
रही
है
बस
ग़मों
में
किसी
की
ज़िंदगी
कितनी
हसीं
है
Ananya Rai Parashar
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तुम
मुझे
इतना
आम
मत
समझो
हर
किसी
के
लिए
नहीं
हूँ
मैं
Ananya Rai Parashar
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रु-ब-रु
ऐसी
पास
बस्ती
है
रोते
चेहरे
उदास
बस्ती
है
Ananya Rai Parashar
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सजाए
रखना
है
इसको
तो
आख़िरी
दम
तक
मैं
अपने
बाग़
के
फूलों
में
देखती
हूँ
तुम्हें
Ananya Rai Parashar
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