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Ananya Rai Parashar
tum mujhe itnaa aam mat samjho
tum mujhe itnaa aam mat samjho | तुम मुझे इतना आम मत समझो
- Ananya Rai Parashar
तुम
मुझे
इतना
आम
मत
समझो
हर
किसी
के
लिए
नहीं
हूँ
मैं
- Ananya Rai Parashar
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मुहब्बत
में
जो
माथा
चूम
कर
वा'दा
किया
उसने
उसे
भी
आम
बातों
का
ही
दर्जा
दे
दिया
उसने
सुधा
के
नाम
पर
विषपान
अब
हम
सेे
नहीं
होगा
सुना
ज्यूँँ
ही
मुहब्बत
से
किनारा
कर
लिया
उसने
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Atul K Rai
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ये
क़त्ल-ए-आम
और
बे-इज़्न
क़त्ल-ए-आम
क्या
कहिए
ये
बिस्मिल
कैसे
बिस्मिल
हैं
जिन्हें
क़ातिल
नहीं
मिलता
वहाँ
कितनों
को
तख़्त
ओ
ताज
का
अरमाँ
है
क्या
कहिए
जहाँ
साइल
को
अक्सर
कासा-ए-साइल
नहीं
मिलता
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Asrar Ul Haq Majaz
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तुम
वो
लड़की
मुझे
लगती
तो
नहीं
आम
गोपी
से
जो
राधा
हो
जाए
Shariq Kaifi
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हमीं
को
क़ातिल
कहेगी
दुनिया
हमारा
ही
क़त्ल-ए-आम
होगा
हमीं
कुएँ
खोदते
फिरेंगे
हमीं
पे
पानी
हराम
होगा
अगर
यही
ज़ेहनियत
रही
तो
मुझे
ये
डर
है
कि
इस
सदी
में
न
कोई
अब्दुल
हमीद
होगा
न
कोई
अब्दुल
कलाम
होगा
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Meraj Faizabadi
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ज़ख़्म
उनके
लिए
मेहमान
हुआ
करते
हैं
मुफ़लिसी
जो
तेरे
दरबान
हुआ
करते
हैं
वो
अमीरों
के
लिए
आम
सी
बातें
होंगी
हम
ग़रीबों
के
जो
अरमान
हुआ
करते
हैं
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Mujtaba Shahroz
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याद
आई
तिरे
पैरों
की
खनकती
पायल
आम
सा
प्रश्न
था
संगीत
किसे
कहते
हैं
Neeraj Neer
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ख़ुद
जिसे
मेहनत
मशक़्क़त
से
बनाता
हूँ
'जमाल'
छोड़
देता
हूँ
वो
रस्ता
आम
हो
जाने
के
बाद
Jamal Ehsani
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तुम
अगर
सीखना
चाहो
मुझे
बतला
देना
आम
सा
फ़न
तो
कोई
है
नहीं
तोहफ़ा
देना
Jawwad Sheikh
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रंग-ओ-रस
की
हवस
और
बस
मसअला
दस्तरस
और
बस
यूँँ
बुनी
हैं
रगें
जिस्म
की
एक
नस
टस
से
मस
और
बस
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Ammar Iqbal
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मोहब्बत
आम
सा
इक
वाक़िआ'
था
हमारे
साथ
पेश
आने
से
पहले
Sarfraz Zahid
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ग़म
भुलाने
की
बात
क्यूँ
न
करें
मुस्कुराने
की
बात
क्यूँ
न
करें
अपनी
तहज़ीब
है
रिवायत
है
हम
ज़माने
की
बात
क्यूँ
न
करें
क्या
ये
शिकवे
ज़ुबां
पे
रखते
हैं
दिल
चुराने
की
बात
क्यूँ
न
करें
बैठकर
साथ
हम
बुजुर्गों
के
घर
घराने
की
बात
क्यूँ
न
करें
वो
जो
मरता
है
मेरी
बातों
पे
उस
दीवाने
की
बात
क्यूँ
न
करें
बात
क्यूँ
कर
हो
आंधियों
की
भला
आशियाने
की
बात
क्यूँ
न
करें
इतनी
ख़ामोशियां
भी
अच्छी
नहीं
गुनगुनाने
की
बात
क्यूँ
न
करें
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Ananya Rai Parashar
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ग़रीबों
की
कुछ
आह-ओ-ज़ारी
भी
सुनिए
बस
अपनी
न
कहिए
हमारी
भी
सुनिए
सुकूँ
दिल
का
सुनते
हैं
गर
आप
साहब
तो
दिल
की
कभी
बेक़रारी
भी
सुनिए
कहीं
तन्हा
हो
जाए
तो
ख़ौफ़
खाए
है
बेबस
यहाँ
कितनी
नारी
भी
सुनिए
समाजों
की
सुननी
है
सच्चाई
तो
फिर
समाजों
की
बंदिश
ख़ुमारी
भी
सुनिए
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Ananya Rai Parashar
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तेरी
यादों
में
ऐसे
जलते
हैं
लम्हा
हर
लम्हा
हम
पिघलते
हैं
हम
तो
चलते
हैं
मस्त
राहों
में
दुनिया
वाले
बहुत
सँभलते
हैं
मेरे
अपने
मेरी
कहानी
में
रंग
किरदार
के
बदलते
हैं
जिंदग़ी
छूट
जाती
है
पीछे
उसकी
गलियों
से
जब
निकलते
हैं
वो
दिवाने
हुए
'अनन्या'
के
जो
मेरे
साथ-साथ
चलते
हैं
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Ananya Rai Parashar
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यूँँ
किसी
की
अता
नहीं
है
ये
अपनी
हस्ती
बनाई
है
मैंने
Ananya Rai Parashar
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मैं
हूँ
वो
आइना
जिस
में
के
शख़्सियत
तेरी
हुई
जो
रू-ब-रू
तो
टूट
फूट
जाएगी
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Ananya Rai Parashar
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