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Ananya Rai Parashar
gham bhulaane ki baat kyuuñ na karen
gham bhulaane ki baat kyuuñ na karen | ग़म भुलाने की बात क्यूँ न करें
- Ananya Rai Parashar
ग़म
भुलाने
की
बात
क्यूँ
न
करें
मुस्कुराने
की
बात
क्यूँ
न
करें
अपनी
तहज़ीब
है
रिवायत
है
हम
ज़माने
की
बात
क्यूँ
न
करें
क्या
ये
शिकवे
ज़ुबां
पे
रखते
हैं
दिल
चुराने
की
बात
क्यूँ
न
करें
बैठकर
साथ
हम
बुजुर्गों
के
घर
घराने
की
बात
क्यूँ
न
करें
वो
जो
मरता
है
मेरी
बातों
पे
उस
दीवाने
की
बात
क्यूँ
न
करें
बात
क्यूँ
कर
हो
आंधियों
की
भला
आशियाने
की
बात
क्यूँ
न
करें
इतनी
ख़ामोशियां
भी
अच्छी
नहीं
गुनगुनाने
की
बात
क्यूँ
न
करें
- Ananya Rai Parashar
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अब
कारगह-ए-दहर
में
लगता
है
बहुत
दिल
ऐ
दोस्त
कहीं
ये
भी
तिरा
ग़म
तो
नहीं
है
Majrooh Sultanpuri
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ये
किस
मक़ाम
पे
लाई
है
ज़िंदगी
हम
को
हँसी
लबों
पे
है
सीने
में
ग़म
का
दफ़्तर
है
Hafeez Banarasi
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यहाँ
वो
कौन
है
जो
इंतिख़ाब-ए-ग़म
पे
क़ादिर
हो
जो
मिल
जाए
वही
ग़म
दोस्तों
का
मुद्दआ'
होगा
Jaun Elia
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पेड़
का
दुख
तो
कोई
पूछने
वाला
ही
न
था
अपनी
ही
आग
में
जलता
हुआ
साया
देखा
Jameel Malik
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गर
उदासी,
चिड़चिड़ापन,
जान
देना
प्यार
है
माफ़
करना,
काम
मुझको
और
भी
हैं
दोस्तो
Divy Kamaldhwaj
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अब
क्या
बताऊँ
मैं
तिरे
मिलने
से
क्या
मिला
इरफ़ान-ए-ग़म
हुआ
मुझे
अपना
पता
मिला
Seemab Akbarabadi
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तेरे
जाने
से
ज़्यादा
हैं
न
कम
पहले
थे
हम
को
लाहक़
हैं
वही
अब
भी
जो
ग़म
पहले
थे
Afzal Khan
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उठाओ
कैमरा
तस्वीर
खींच
लो
इन
की
उदास
लोग
कहाँ
रोज़
मुस्कराते
हैं
Malikzada Javed
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आँख
में
नम
तक
आ
पहुँचा
हूँ
उसके
ग़म
तक
आ
पहुँचा
हूँ
पहली
बार
मुहब्बत
की
थी
आख़री
दम
तक
आ
पहुँचा
हूँ
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Khalil Ur Rehman Qamar
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अपनी
हालत
का
ख़ुद
एहसास
नहीं
है
मुझ
को
मैं
ने
औरों
से
सुना
है
कि
परेशान
हूँ
मैं
Aasi Uldani
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ख़ुद
को
इतना
न
परेशाँ
रखिए
मुस्कुराने
पे
भी
रोना
आए
Ananya Rai Parashar
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दिल
किसी
से
भी
अगर
लगता
है
फिर
तो
दीवार
से
सर
लगता
है
एक
बस
तुमको
ही
चाहूँ
लेकिन
मुझको
इस
इश्क़
से
डर
लगता
है
तेरी
यादों
से
सजाती
हूँ
जब
मुस्कुराता
हुआ
घर
लगता
है
हम
सेफ़र
तू
जो
नहीं
है
मेरा
रूठा
रूठा
सा
सफ़र
लगता
है
मीठे
मीठे
से
ख़याल
आते
हैं
तेरी
बातों
का
असर
लगता
है
अब
नहीं
है
वो
'अनन्या'
तेरा
सच
नहीं
है
ये
मगर
लगता
है
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Ananya Rai Parashar
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मेरी
निगाह
में
अक्सर
जो
तुम
सेे
बनता
है
बहुत
हसीं
है
वो
मंज़र
जो
तुम
सेे
बनता
है
Ananya Rai Parashar
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जब
तलक
तेरा
इंतिज़ार
ना
था
दिल
मेरा
इतना
बेक़रार
ना
था
प्यार
था
रूठना
मनाना
था
सब
था
रिश्ते
में
पर
दरार
ना
था
मैं
जो
बेफ़िक्र
आसमाँ
में
थी
मुझपे
दुनिया
का
कुछ
उधार
ना
था
उसको
कुछ
और
तलब
थी
मुझ
सेे
उसपे
मेरा
ज़ुनून
सवार
ना
था
फूल
खिल
के
भी
मुस्कुराये
नहीं
कोई
मौसम
था
पर
बहार
ना
था
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Ananya Rai Parashar
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कौन
ढूंँढे
मुझे
है
फिक्र
किसे
मेरा
गुम
रहना
कितना
अच्छा
है
Ananya Rai Parashar
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