zeest ki yuñ to shaam tak pahunchen | ज़ीस्त की यूँँ तो शाम तक पहुँचे इश्क़ में पर सलाम तक पहुँचे

  - Anand Panday Tanha
ज़ीस्तकीयूँँतोशामतकपहुँचेइश्क़मेंपरसलामतकपहुँचे
गुफ़्तुगूजबहुईनिगाहोंमें
वस्लकेहमपयामतकपहुँचे
रोज़उसकीगलीमेंठहरेंहम
क्यापताकबवोबामतकपहुँचे
आख़िरशवोहुएपशेमाँही
लोगजोइंतिक़ामतकपहुँचे
क्यूँमिलबैठकरसुल्हकरलें
मसअलाक्यूँनिज़ामतकपहुँचे
राज़-ए-दिलदोस्तसेभीमतकहना
क्यापतायेतमामतकपहुँचे
दौरजबइंतिख़ाबकाआया
हुक्मराँतबअवामतकपहुँचे
दर्दकुछऔरदेज़मानातो
शाइ'रीइकमक़ामतकपहुँचे
  - Anand Panday Tanha
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