ik ladki ke rukh par kya be-zaari hai | इक लड़की के रुख़ पर क्या बे-ज़ारी है

  - Ammar Yasir Migsi
इकलड़कीकेरुख़परक्याबे-ज़ारीहै
फूलोंकोभीखिलनेमेंदुश्वारीहै
इश्क़मेंजबभीकोईशख़्सउजड़ताहै
लगताहैअबअगलीमेरीबारीहै
उससेपूछोख़्वाबोंकाअबक्याहोगा
दिनमेंजिसनेमुझपरनींदउतारीहै
मुर्शिदबसमैंख़ुदसेनफ़रतकरताहूँ
मुर्शिदमुझकोसोचनेकीबीमारीहै
डूबरहेहैंलोगसमुंदरमें'अम्मार'
उसनेइनआँखोंकीनक़्लउतारीहै
  - Ammar Yasir Migsi
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