shaam dhale jab bastii waale laut ke ghar ko aate hain | शाम ढले जब बस्ती वाले लौट के घर को आते हैं

  - Amjad Islam Amjad
शामढलेजबबस्तीवालेलौटकेघरकोआतेहैं
आहटआहटदस्तकदस्तकक्याक्याहमघबरातेहैं
अहल-ए-जुनूँतोदिलकीसदापरजानसेअपनीजाभीचुके
अहल-ए-ख़िरदअबजानेहमकोक्यासमझानेआतेहैं
जैसेरेलकीहरखिड़कीकीअपनीअपनीदुनियाहै
कुछमंज़रतोबननहींपातेकुछपीछेरहजातेहैं
जिसकीहरइकईंटमेंजज़्बहैंउनकेअपनेहीआँसू
वाएकिअबवोअहल-ए-दुआहीइसमेहराबकोढातेहैं
आजकीशबतोकटहीचलीहैख़्वाबोंऔरसराबोंमें
आनेवालेदिनअबदेखेंक्यामंज़रदिखलातेहैं
सारीउम्रहीदिलसेअपनाऐसाकुछबरतावरहा
जैसेखेलमेंहारनेवालेबच्चेकोबहलातेहैं
ना-मुम्किनकोमुमकिन'अमजद'अहल-ए-वफ़ाहीकरसकतेहैं
पानीऔरहवापरदेखोक्याक्यानक़्शबनातेहैं
  - Amjad Islam Amjad
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