jab bhi aankhoñ men tire vasl ka lamha chamka | जब भी आँखों में तिरे वस्ल का लम्हा चमका

  - Amjad Islam Amjad
जबभीआँखोंमेंतिरेवस्लकालम्हाचमका
चश्म-ए-बे-आबकीदहलीज़पेदरियाचमका
फ़स्ल-ए-गुलआईखुलेबाग़मेंख़ुश्बूकेअलम
दिलकेसाहिलपेतिरेनामकाताराचमका
अक्सबे-नक़्शहुएआइनेधुँदलानेलगे
दर्दकाचाँदसर-ए-बाम-ए-तमन्नाचमका
रंगआज़ादहुएगुलकीगिरहखुलतेही
एकलम्हेमेंअजबबाग़काचेहराचमका
पैरहनमेंभीतिराहुस्नथाहश्रसेकम
जबखुलेबंद-ए-क़बाऔरहीनक़्शाचमका
दिलकीदीवारपेउड़तेरहेमल्बूसकेरंग
देरतकउनमेंतिरीयादकासायाचमका
रूहकीआँखचका-चौंदहुईजातीहै
किसकीआहटकामिरेकानमेंनग़्माचमका
लहरेंउठउठकेमगरउसकाबदनचूमतीथीं
वोजोपानीमेंगयाख़ूबहीदरियाचमका
हिज्रपनपातिरावस्लहमेंरासआया
किसीमैदानमेंताराहमाराचमका
जैसेबारिशसेधुलेसेहन-ए-गुलिस्ताँ'अजमद'
आँखजबख़ुश्कहुईऔरवोचेहराचमका
  - Amjad Islam Amjad
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