huzoor-e-yaar men harf iltijaa ke rakhe the | हुज़ूर-ए-यार में हर्फ़ इल्तिजा के रक्खे थे

  - Amjad Islam Amjad
हुज़ूर-ए-यारमेंहर्फ़इल्तिजाकेरक्खेथे
चराग़सामनेजैसेहवाकेरक्खेथे
बसएकअश्क-ए-नदामतनेसाफ़करडाले
वोसबहिसाबजोहमनेउठाकेरक्खेथे
सुमूम-ए-वक़्तनेलहजेकोज़ख़्मज़ख़्मकिया
वगरनाहमनेक़रीनेसबाकेरक्खेथे
बिखररहेथेसोहमनेउठालिएख़ुदही
गुलाबजोतिरीख़ातिरसजाकेरक्खेथे
हवाकेपहलेहीझोंकेसेहारमानगए
वहीचराग़जोहमनेबचाकेरक्खेथे
तुमहीनेपाँवरक्खावगरनावस्लकीशब
ज़मींपेहमनेसितारेबिछाकेरक्खेथे
मिटासकीउन्हेंरोज़शबकीबारिशभी
दिलोंपेनक़्शजोरंग-ए-हिनाकेरक्खेथे
हुसूल-ए-मंज़िल-ए-दुनियाकुछऐसाकामथा
मगरजोराहमेंपत्थरअनाकेरक्खेथे
  - Amjad Islam Amjad
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