shiddat-e-gham se jo KHaamosh zabaan hoti hai | शिद्दत-ए-ग़म से जो ख़ामोश ज़बाँ होती है

  - Amjad Ali Ghaznawi
शिद्दत-ए-ग़मसेजोख़ामोशज़बाँहोतीहै
दिलकीहरबातनिगाहोंसेबयाँहोतीहै
यहीशबनमजोगुल-ओ-ग़ुन्चाकीजाँहोतीहै
बाज़औक़ातगुलिस्ताँपेगिराँहोतीहै
बसवहींसाहिल-ए-उम्मीदउभरआताहै
कश्ती-ए-दिलब-खु़शीग़र्क़जहाँहोतीहै
अहल-ए-दिलअहल-ए-यकींअहल-ए-अमलकेआगे
राहदुश्वारभीदुश्वारकहाँहोतीहै
कश्ती-ए-उम्रहैतूफ़ान-ए-हवादिसमेंमगर
ग़र्क़होतीहैयेज़ालिमरवाँहोतीहै
हमतोदीवाना-ए-मंज़िलहैंहमेंक्यामालूम
सुब्हहोतीहैकहाँशामकहाँहोतीहै
कहदोगुलचींसेकिफूलोंकोसँभलकरतोड़े
इन्हींफूलोंमेंनिहाँबर्क़-ए-तपाँहोतीहै
  - Amjad Ali Ghaznawi
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