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Daqiiq Jabaali
ye bhi to jeevan ki ik sachchaai hai
ye bhi to jeevan ki ik sachchaai hai | ये भी तो जीवन की इक सच्चाई है
- Daqiiq Jabaali
ये
भी
तो
जीवन
की
इक
सच्चाई
है
माँ
के
आँसू
बस
माँ
ने
ही
देखे
हैं
- Daqiiq Jabaali
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आँसू
हमारे
गिर
गए
उन
की
निगाह
से
इन
मोतियों
की
अब
कोई
क़ीमत
नहीं
रही
Jaleel Manikpuri
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बिठा
दिया
है
सिपाही
के
दिल
में
डर
उसने
तलाशी
दी
है
दुपट्टा
उतार
कर
उसने
मैं
इसलिए
भी
उसे
ख़ुद-कुशी
से
रोकता
हूँ
लिखा
हुआ
है
मेरा
नाम
जिस्म
पर
उसने
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Zia Mazkoor
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रो
रहा
था
गोद
में
अम्माँ
की
इक
तिफ़्ल-ए-हसीं
इस
तरह
पलकों
पे
आँसू
हो
रहे
थे
बे-क़रार
जैसे
दीवाली
की
शब
हल्की
हवा
के
सामने
गाँव
की
नीची
मुंडेरों
पर
चराग़ों
की
क़तार
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Ehsan Danish
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गर्म
आँसू
और
ठंडी
आहें
मन
में
क्या
क्या
मौसम
हैं
इस
बग़िया
के
भेद
न
खोलो
सैर
करो
ख़ामोश
रहो
Ibn E Insha
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हम
कुछ
ऐसे
उसके
आगे
अपनी
वफ़ा
रख
देते
हैं
बच्चे
जैसे
रेल
की
पटरी
पर
सिक्का
रख
देते
हैं
तस्वीर-ए-ग़म,
दिल
के
आँसू,
रंजो-नदामत,
तन्हाई
उसको
ख़त
लिखते
हैं
ख़त
में
हम
क्या
क्या
रख
देते
हैं
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Subhan Asad
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माँ
के
आँसू
को
समझता
हूँ
मुक़द्दस
इतना
बस
उन्हें
चूम
ले
अफ़ज़ल
तो
वज़ू
हो
जाए
S M Afzal Imam
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वक़्त,
वफ़ा,
हक़,
आँसू,
शिकवे
जाने
क्या
क्या
माँग
रहे
थे
एक
सहूलत
के
रिश्ते
से
हम
ही
ज़्यादा
माँग
रहे
थे
उसकी
आँखें
उसकी
बातें
उसके
लब
वो
चेहरा
उसका
हम
उसकी
हर
एक
अदास
अपना
हिस्सा
माँग
रहे
थे
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Shikha Pachouly
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मुद्दत
के
बाद
उस
ने
जो
की
लुत्फ़
की
निगाह
जी
ख़ुश
तो
हो
गया
मगर
आँसू
निकल
पड़े
Kaifi Azmi
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क्या
दुख
है
समुंदर
को
बता
भी
नहीं
सकता
आँसू
की
तरह
आँख
तक
आ
भी
नहीं
सकता
तू
छोड़
रहा
है
तो
ख़ता
इस
में
तेरी
क्या
हर
शख़्स
मेरा
साथ
निभा
भी
नहीं
सकता
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Waseem Barelvi
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रास्ता
जब
इश्क़
का
मौजूद
है
फिर
किसी
की
क्यूँँ
इबादत
कीजिए?
ख़ुद-कुशी
करना
बहुत
आसान
है
कुछ
बड़ा
करने
की
हिम्मत
कीजिए
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Bhaskar Shukla
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जल्दी
किसी
पे
यार
भरोसा
न
कर
अमित
रावण
छिपे
हो
सकते
हैं
राघव
की
खाल
में
Daqiiq Jabaali
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दोस्ती
सिर्फ़
दो
चार
से
है
मेरी
बाकी
सब
तो
फ़क़त
नाम
के
दोस्त
हैं
Daqiiq Jabaali
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वो
तो
कली
से
बन
गई
है
अब
'अमित'
गुलाब
अब
तितलियाँ
भी
बैठती
हैं
उसके
गाल
में
Daqiiq Jabaali
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कभी
घर
पर
कभी
बाहर
तुम्हारी
बात
करता
हूँ
ज़ियादा
तो
नहीं
दिनभर
तुम्हारी
बात
करता
हूँ
तुम्हारी
बातें
कर-कर
के
ही
तो
मैं
बन
गया
शायर
मैं
शायर
हूँ
सो
मैं
अक्सर
तुम्हारी
बात
करता
हूँ
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Daqiiq Jabaali
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हाल
मेरा
पूछते
तो
हो
नहीं
तुम
ख़ुद
को
मेरा
दोस्त
कहते
फिर
रहे
हो
Daqiiq Jabaali
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