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Daqiiq Jabaali
ya KHuda jeene ki ik wajah chahiye
ya KHuda jeene ki ik wajah chahiye | या ख़ुदा जीने की इक वजह चाहिए
- Daqiiq Jabaali
या
ख़ुदा
जीने
की
इक
वजह
चाहिए
उसके
दिल
में
ज़रा
सी
जगह
चाहिए
- Daqiiq Jabaali
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हमारा
दिल
तो
हमेशा
से
इक
जगह
पर
है
तुम्हारा
दर्द
ही
रस्ता
भटक
गया
होगा
Zubair Ali Tabish
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जगह
की
क़ैद
नहीं
थी
कोई
कहीं
बैठे
जहाँ
मक़ाम
हमारा
था
हम
वहीं
बैठे
अमीर-ए-शहर
के
आने
पे
उठना
पड़ता
है
लिहाज़ा
अगली
सफ़ों
में
कभी
नहीं
बैठे
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Mehshar Afridi
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अपनी
मंज़िल
पे
पहुँचना
भी
खड़े
रहना
भी
कितना
मुश्किल
है
बड़े
हो
के
बड़े
रहना
भी
Shakeel Azmi
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ये
जो
दीवार
अँधेरों
ने
उठा
रक्खी
है
मेरा
मक़्सद
इसी
दीवार
में
दर
करना
है
Azm Shakri
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पहले
थोड़ी
मुश्किल
होगी
आगे
लेकिन
मंज़िल
होगी
सब
बाराती
शायर
होंगे
मेरी
शादी
महफ़िल
होगी
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Tanoj Dadhich
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तू
उसके
दिल
में
जगह
चाहता
है
यार
जो
शख़्स
किसी
को
देता
नहीं
अपने
साथ
वाली
जगह
Umair Najmi
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मंज़िल
पे
न
पहुँचे
उसे
रस्ता
नहीं
कहते
दो
चार
क़दम
चलने
को
चलना
नहीं
कहते
इक
हम
हैं
कि
ग़ैरों
को
भी
कह
देते
हैं
अपना
इक
तुम
हो
कि
अपनों
को
भी
अपना
नहीं
कहते
कम-हिम्मती
ख़तरा
है
समुंदर
के
सफ़र
में
तूफ़ान
को
हम
दोस्तो
ख़तरा
नहीं
कहते
बन
जाए
अगर
बात
तो
सब
कहते
हैं
क्या
क्या
और
बात
बिगड़
जाए
तो
क्या
क्या
नहीं
कहते
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Nawaz Deobandi
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तुम्हें
लगा
है
कि
मेरे
होते,
तुम्हें
भी
दिल
में
जगह
मिलेगी
बड़ी
ही
इज़्ज़त
से
कह
रहा
हूँ
,चलो
उठो
अब
मेरी
जगह
से
Shadab Asghar
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मिलने
का
वा'दा
उन
के
तो
मुँह
से
निकल
गया
पूछी
जगह
जो
मैंने
कहा
हँस
के
ख़्वाब
में
Unknown
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देखो
मुझे
अब
मेरी
जगह
से
न
हिलाना
फिर
तुम
मुझे
तरतीब
से
रख
कर
नहीं
जाते
Danish Naqvi
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ये
सोचता
ख़राब
है
कहता
ख़राब
है
दावे
से
कह
रहा
हूँ
ये
बंदा
ख़राब
है
Daqiiq Jabaali
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कब
लगेगी
नौकरी
,कब
ये
तुम्हारा
हाथ
माँगे
बस
इसी
चक्कर
में
लड़कों
की
जवानी
जा
रही
है
Daqiiq Jabaali
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तुम
क्या
जानो
शायर
कितना
ग़म
सहता
है
तब
जा
कर
के
दो
मिसरों
में
कुछ
कहता
है
दुनिया
भर
में
ढूँढा
मैंने
तब
ये
जाना
तूँ
तो
मेरे
दिल
के
भीतर
ही
रहता
है
वो
तो
झूठा
है
जो
रोता
है
महफ़िल
में
सच्चा
आँसू
तो
तन्हाई
में
बहता
है
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Daqiiq Jabaali
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बच्चों
की
तरह
आज
बहुत
फूट
के
रोए
हम
इतने
परेशाँ
थे
कि
फिर
टूट
के
रोए
Daqiiq Jabaali
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तुम
मुझको
कहते
हो
पागल
लेकिन
दुनिया
जीती
है
पागल
लोगों
ने
Daqiiq Jabaali
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