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Daqiiq Jabaali
pyaar karne se dar raha tha main
pyaar karne se dar raha tha main | प्यार करने से डर रहा था मैं
- Daqiiq Jabaali
प्यार
करने
से
डर
रहा
था
मैं
हाँ
बड़ी
ग़लती
कर
रहा
था
मैं
तुमने
आकर
बचा
लिया
मुझको
वरना
हर
रोज़
मर
रहा
था
मैं
- Daqiiq Jabaali
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फ़ुर्सत
नहीं
मुझे
कि
करूँँ
इश्क़
फिर
से
अब
माज़ी
की
चोटों
से
अभी
उभरा
नहीं
हूँ
मैं
डर
है
कहीं
ये
ऐब
उसे
रुस्वा
कर
न
दे
सो
ग़म
में
भी
शराब
को
छूता
नहीं
हूँ
मैं
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Harsh saxena
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प्यार
की
जोत
से
घर
घर
है
चराग़ाँ
वर्ना
एक
भी
शम्अ
न
रौशन
हो
हवा
के
डर
से
Shakeb Jalali
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डर
है
घर
में
कैसे
बोला
जाएगा
छोड़ो
जो
भी
होगा
देखा
जाएगा
मैं
बस
उसका
चेहरा
पढ़कर
जाऊँगा
मेरा
पेपर
सब
सेे
अच्छा
जाएगा
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Vishal Singh Tabish
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हर
इक
सू
हैं
दर-ओ-दीवार
लेकिन
मुयस्सर
है
नहीं
घर-बार
लेकिन
Umrez Ali Haider
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हुस्न
ने
शौक़
के
हंगा
में
तो
देखे
थे
बहुत
इश्क़
के
दावा-ए-तक़दीस
से
डर
जाना
था
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Asrar Ul Haq Majaz
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बात
करो
रूठे
यारों
से
सन्नाटों
से
डर
जाते
हैं
प्यार
अकेला
जी
लेता
है
दोस्त
अकेले
मर
जाते
हैं
Kumar Vishwas
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मुसाफ़िरों
के
दिमाग़ों
में
डर
ज़ियादा
है
न
जाने
वक़्त
है
कम
या
सफ़र
ज़ियादा
है
Hashim Raza Jalalpuri
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शग़्ल
था
दश्त-नवर्दी
का
कभी
ऐ
'ताबाँ'
अब
गुलिस्ताँ
में
भी
जाते
हुए
डर
लगता
है
Anwar Taban
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अस्ल
में
पाया
ही
'दानिश'
तब
उसे
जब
उसे
खोने
का
डर
जाता
रहा
Madan Mohan Danish
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हुनर
से
काम
लिया
पेंट
ब्रश
नहीं
तोड़ा
बना
लिया
तेरे
जैसा
ही
कोई
रंगों
से
मुझे
ये
डर
है
कि
मिल
जाएगी
तो
रो
दूँगा
मैं
जिस
ख़ुशी
को
तरसता
रहा
हूँ
बरसों
से
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Rahul Gurjar
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बच्चों
की
तरह
आज
बहुत
फूट
के
रोए
हम
इतने
परेशाँ
थे
कि
फिर
टूट
के
रोए
Daqiiq Jabaali
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हाल
मेरा
पूछते
तो
हो
नहीं
तुम
ख़ुद
को
मेरा
दोस्त
कहते
फिर
रहे
हो
Daqiiq Jabaali
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दशानन
के
अहम
को
चूर
तो
हनुमत
ही
कर
देते
मगर
शबरी
के
घर
पे
राम
का
जाना
ज़रूरी
था
Daqiiq Jabaali
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बात
ज़्यादा
किसी
से
मैं
करता
नहीं
मेरे
अंदर
यही
इक
कमी
रह
गई
Daqiiq Jabaali
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ये
ऐसा
है
वो
वैसा
है
अब
इस
से
तुम
को
क्या
लेना
या
तो
सब
सेे
मतलब
रक्खो
या
बस
हम
सेे
मतलब
रक्खो
Daqiiq Jabaali
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