she'r KHud ko hi sunaata rehta hooñ main | शे'र ख़ुद को ही सुनाता रहता हूँ मैं

  - Daqiiq Jabaali
शे'रख़ुदकोहीसुनातारहताहूँमैं
अपनीतन्हाईमिटातारहताहूँमैं
बसयहीइककामतोसीखाहैमैंने
हाँसभीकेदिलदुखातारहताहूँमैं
शा'इरीमुझकोकहाँआतीहैयारों
अपनादुखहीतोसुनातारहताहूँमैं
अबतोआदतपड़गईहैयारमुझको
सबसेेयूँँहीधोखाखातारहताहूँमैं
मुझकोतोजन्नतमिलेगीमेरेयारों
माँकेपैरोंकोदबातारहताहूँमैं
दिलमेरामिलतानहींयारोंकिसीसे
हाथपरसबसेेमिलातारहताहूँमैं
मैंज़ियादाबातेंतोकरतानहींहूँ
आजकलबसग़ज़लेंगातारहताहूँमैं
आजफिरमिलनेगयाथामैं‘अमित’से
शायरोंकेपासजातारहताहूँमैं
  - Daqiiq Jabaali
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