jaise shaakhon se patte lage rahte hain | जैसे शाख़ों से पत्ते लगे रहते हैं

  - Amit Kumar
जैसेशाख़ोंसेपत्तेलगेरहतेहैं
इसतरहसेहीघरकेबड़ेरहतेहैं
जानतेहैकिदुनियाहैयेमतलबी
फिरभीउसकेलिएहमखड़ेरहतेहैं
उसकायेदिलउसेइश्क़होयाहो
अपनीजानिबसेहमतोलगेरहतेहैं
मैंबिठालेताहूँपासतन्हाईको
दोनोफिरदेरतकबसपड़ेरहतेहैं
ज़िंदगीमुफ़लिसीपेतमाचाहैइक
हिस्सेजिनकेसभीदुखजड़ेरहतेहैं
आतेहोंगेसुनहरेतुम्हेंख़्वाबपर
देरतकसुब्हहमतोजगेरहतेहैं
इसलिएअबभरोसाहैंग़ैरोंसेअब
अबकहाँअच्छेसेभीसगेरहतेहैं
  - Amit Kumar
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy